बालावाला क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर जिलाधिकारी देहरादून के निरीक्षण के बाद अब संबंधित विभाग हरकत में दिखाई दे रहा है। 18 सितंबर को जिलाधिकारी द्वारा मियांवाला क्षेत्र के दौरे के दौरान पीलीकोठी–गैस गोदाम–वांगी पुलिया मोटर मार्ग की स्थिति का निरीक्षण किया गया था। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, सड़क कटिंग के बाद मरम्मत न होना और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति सामने आने के बाद जिलाधिकारी की ओर से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसके बाद PWD की ओर से 19 सितंबर को उप कार्यक्रम निदेशक, PIU, उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में सड़क कटिंग के बाद मार्ग को सुरक्षित एवं सुगम यातायात के योग्य नहीं बनाए जाने तथा निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सड़क को संबंधित विभाग को हस्तांतरित किए जाने के बाद सामान्य मरम्मत एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है, लेकिन सड़क पर हुए गड्ढों और खराब हिस्सों पर आवश्यक मरम्मत नहीं की गई। अधिकारी से दो दिन के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण मांगा गया है और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सितंबर 2026 का वेतन रोकने की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
अब शुरू हुआ सड़क निर्माण, लेकिन श्रेय लेने की होड़
जिलाधिकारी के निरीक्षण और इसके बाद जारी नोटिस का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। बालावाला क्षेत्र की जिन सड़कों को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं, वहां अब मरम्मत और सड़क निर्माण का काम शुरू होने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़कें बदहाल थीं, तब जनता की समस्या उठाने के बजाय अब काम शुरू होते ही कुछ छुटभैये नेता और स्थानीय राजनीतिक चेहरे इसका श्रेय लेने की कोशिश में जुट गए हैं।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम में दस्तावेजी तौर पर यह स्पष्ट है कि 18 सितंबर को जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद संबंधित विभाग को नोटिस जारी हुआ और सड़क की स्थिति को लेकर जवाबदेही तय की गई। ऐसे में सड़क सुधार की कार्रवाई का श्रेय किसे दिया जाए, यह सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
जनता का सवाल सीधा है—जब सड़कें बदहाल थीं तब कौन खड़ा था और जब प्रशासनिक कार्रवाई के बाद काम शुरू हुआ तो श्रेय लेने वाले अचानक कहां से आ गए?

