उत्तराखंड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा 05 नवंबर 2026 को जारी महत्वपूर्ण शासनादेश के बाद प्रदेश में याचिकाकर्ता प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों को उनकी वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ा लंबे समय से प्रतीक्षित लाभ मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। चयन वर्ष 2007-08 की रिक्तियों के सापेक्ष उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की पुनरीक्षित चयन समिति (Review DPC) की संस्तुति और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है। इस फैसले के तहत चंद्र सिंह मार्तोलिया, उत्तम सिंह चौहान, हरवीर सिंह और जगदीश चंद्र कांडपाल को डिप्टी कलेक्टर के पद पर अब 2010 के बजाय 01 अक्टूबर 2007 की तिथि से नियमित पदोन्नति और वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया गया है।
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2007 की रिक्तियों और प्रमोटी तथा सीधी भर्ती के पीसीएस अधिकारियों के बीच वरिष्ठता के निर्धारण को लेकर शुरू हुआ था। पूर्व में इस मामले को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय में रिट याचिका (संख्या-68/2013) योजित की गई थी, जिस पर 08 अगस्त 2019 को उच्च न्यायालय ने याचियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए चार महीने के भीतर वरिष्ठता सूची संशोधित करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और कुछ अन्य पक्षों द्वारा उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिकाएं एवं सिविल अपीलें (जैसे सिविल अपील संख्या-3070/2024 आदि) दायर की गईं, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को एक साथ सुनते हुए खारिज कर दिया और प्रमोटी अधिकारियों के पक्ष को बरकरार रखा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि प्रमोटियों को 01 अक्टूबर 2007 से डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियमित नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए तथा तीन महीने के भीतर संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की जानी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के इसी निर्णय के अनुपालन में शासन ने अब औपचारिक शासनादेश जारी करते हुए इन चारों अधिकारियों को 01 अक्टूबर 2007 से प्रभावी लाभ देने के निर्देश दे दिए हैं। शासन के नए आदेश के अनुसार इन अधिकारियों की संवर्ग के अंतर्गत ज्येष्ठता का निर्धारण नियमानुसार अलग से किया जाएगा तथा संशोधित तिथि के आधार पर नियमानुसार 5, 12 और 14 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने पर मिलने वाले वरिष्ठ वेतनमान, चयन श्रेणी एवं विशेष श्रेणी वेतनमान के आदेश भी प्रभावी होंगे। इसके साथ ही संशोधित तिथि के आधार पर बकाया धनराशि के भुगतान और आईएएस (IAS) में पदोन्नति के लिए रिक्तियों के सापेक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी संबंधित विभागों को दे दिए गए हैं।
खास बात यह है कि शासन द्वारा अब इसी फार्मूले के आधार पर अन्य 13 अधिकारियों की भी सीनियॉरिटी तय की जाने वाली है, जिसके बाद ये सभी 17 प्रमोटी अधिकारी वर्ष 2009-10 के सीधी भर्ती के बैच से ऊपर आ जाएंगे। चूँकि अभी तक विभिन्न ग्रेडों में जितनी भी संयुक्त पदोन्नतियां हुई थीं, वे सभी अंतिम आदेशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अधीन रखी गई थीं, इसलिए इस बड़े फैसले के बाद सीधी भर्ती के अधिकारियों की पुरानी पदोन्नतियां भारी रूप से प्रभावित होंगी। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) के पद पर तैनात कई अधिकारी वापस एडीएम (अपर जिलाधिकारी) स्तर पर रोल बैक होने की पूरी संभावना बन गई है, और यदि यही फार्मूला आगे की भर्तियों पर भी लागू किया गया, तो एडीएम की कुर्सी पर बैठे कुछ अन्य अधिकारी भी नीचे डिमोशन या रोल बैक होने के दायरे में आ सकते हैं। कार्मिक विभाग के उक्त आदेश के क्रियावन होने से वर्तमान में पदोन्नत संवर्ग के ऐसे अधिकारी जो उच्चतम न्यायालय के पारित निर्णय से अच्छादित होंगे, उन्हें भी इसी प्रकार का लाभ मिलना संभव हो सकेगा।
आईएएस पदोन्नति के लिहाज से भी इस फैसले का महत्व काफी बढ़ गया है। वर्ष 2023 में पदोन्नति कोटे के तहत आईएएस के तीन पद रिक्त थे, जबकि वर्ष 2024 में चार, वर्ष 2025 में तीन और वर्ष 2026 में दो पद रिक्त रहे। इस तरह फिलहाल आईएएस पदोन्नति कोटे के तहत कुल 12 पद रिक्त हैं। वहीं, शासन की ओर से आईएएस कैडर रिव्यू का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा गया है। प्रस्तावित कैडर रिव्यू में उत्तराखंड आईएएस कैडर में तीन पद बढ़ाए जाने की संभावना है, जिनमें से एक से दो पद पदोन्नति कोटे में भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में वर्तमान रिक्तियों और संभावित कैडर विस्तार को मिलाकर इस बार करीब 13 से 14 अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नति मिलने का रास्ता बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों की संशोधित वरिष्ठता लागू होने के बाद आईएएस पदोन्नति की पात्रता और वरिष्ठता सूची में भी बदलाव होगा। ऐसे में लंबे समय से लंबित वरिष्ठता विवाद का निस्तारण न केवल पीसीएस संवर्ग की पदोन्नतियों को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी आईएएस पदोन्नति प्रक्रिया में भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
आईएएस पदोन्नति के लिए सभी 17 प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों का रास्ता नहीं खुलेगा। इनमें से केवल वही अधिकारी पदोन्नति के पात्र होंगे, जो निर्धारित अर्हता पूरी करते हैं। इसके लिए संबंधित रिक्ति वर्ष से अधिकारी की सेवानिवृत्ति की तिथि तक न्यूनतम करीब 4 वर्ष की सेवा शेष होना आवश्यक है। यानी जिस वर्ष की रिक्ति के सापेक्ष आईएएस पदोन्नति होनी है, उस वर्ष संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम चार वर्ष शेष होने चाहिए। ऐसे में वरिष्ठता में ऊपर आने वाले सभी 17 अधिकारियों को स्वतः आईएएस बनने का लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि रिक्ति वर्षवार निर्धारित पात्रता और अन्य सेवा शर्तों के आधार पर ही पदोन्नति के लिए उनके नामों पर विचार किया जाएगा।




