उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027: ECI की सख्त प्रशासनिक नीति, चुनाव कार्यों से जुड़े अधिकारियों के तबादलों और तैनाती पर नए निर्देश !!

भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड सहित पाँच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव संचालन से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती को लेकर अत्यंत सख्त और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उत्तराखंड विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होने जा रहा है, जिसके चलते राज्य में चुनावी तैयारियों और प्रशासनिक फेरबदल का दौर शुरू हो गया है। आयोग की स्थापित नीति के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े किसी भी अधिकारी को उनके गृह जिले (Home District) या उन स्थानों पर तैनात नहीं किया जाएगा जहाँ उन्होंने पूर्व में लंबी अवधि तक सेवा दी हो।

जारी किए गए निर्देशों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी ने पिछले चार वर्षों के दौरान संबंधित जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है या 31 मार्च 2027 तक उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है, तो उन्हें उस जिले से अनिवार्य रूप से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। यह नियम जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों, उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों, विकास अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस विभाग के अधिकारियों (जैसे एसएसपी, एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर) पर भी सख्ती से लागू होगा। इसके अतिरिक्त, आबकारी और परिवहन विभाग (जैसे आरटीओ और एआरटीओ) के अधिकारियों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।

उत्तराखंड के संदर्भ में सेवानिवृत्ति और विशेष परिस्थितियों से जुड़े मामलों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। जो अधिकारी 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें आयोग के सामान्य स्थानांतरण दिशा-निर्देशों के दायरे से छूट दी गई है। हालांकि, यदि ऐसे अधिकारी गृह जिले या तीन साल के मानदंड के अंतर्गत आते हैं और किसी चुनाव से जुड़े पद पर तैनात हैं, तो उन्हें उस चुनाव संबंधी प्रभार से मुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन उन्हें जिले से बाहर स्थानांतरित करना अनिवार्य नहीं होगा। इसके अलावा, राज्य मुख्यालय पर तैनात अधिकारियों तथा चुनाव प्रक्रिया से सीधे तौर पर न जुड़े कर्मियों जैसे डॉक्टरों, इंजीनियरों, शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को इस ट्रांसफर नीति से बाहर रखा गया है, बशर्ते उनके खिलाफ राजनीतिक पक्षपात की कोई प्रमाणित शिकायत न हो।

चुनाव की निष्पक्षता को और अधिक पुख्ता करने के लिए आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला या पूर्व में कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित है, उन्हें किसी भी चुनावी ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी अधिकारी को उस निर्वाचन क्षेत्र या जिले में पुनः तैनात न किया जाए जहाँ वे पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव के दौरान तैनात रहे हों। चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों को नामांकन पत्रों की अंतिम तिथि के दो दिनों के भीतर एक निर्धारित प्रारूप में घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें यह बताना होगा कि उनका कोई भी करीबी रिश्तेदार चुनाव लड़ रहा राजनीतिक पदाधिकारी नहीं है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।

आदेश में कुछ अन्य विशिष्ट प्रशासनिक निर्देश भी शामिल किए गए हैं, जिसके तहत सेक्टर ऑफिसर और जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त अधिकारी इन सामान्य स्थानांतरण निर्देशों के दायरे में कवर नहीं होते हैं, हालांकि पर्यवेक्षकों, सीईओ, डीईओ और आरओ को उनके निष्पक्ष आचरण पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, फोटो मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश मुख्य निर्वाचन अधिकारी के परामर्श से सूचियों के अंतिम प्रकाशन के बाद ही लागू होंगे।

सेवा विस्तार या पुनः नियोजित विभिन्न क्षमताओं वाले राज्य के सभी अधिकारियों (मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में तैनात कर्मियों को छोड़कर) को किसी भी चुनाव संबंधी कार्य से नहीं जोड़ा जाएगा। स्थानांतरित अधिकारियों के स्थान पर नए अधिकारियों की पदस्थापना करते समय मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अनिवार्य रूप से परामर्श किया जाएगा। साथ ही, पिछले चार वर्षों के दौरान ‘राज्य मुख्यालय’ में दी गई सेवाओं को वर्तमान जिले में तीन साल की अवधि की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा, भले ही वह मुख्यालय उसी राजस्व जिले में स्थित हो। चुनाव ड्यूटी से वंचित किए गए अधिकारियों के नामों की ट्रैकिंग आयोग के 23 दिसंबर 2008 के पत्र के तहत की जाएगी।