उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय में शायद आदेश निकालना ही कार्रवाई का पर्याय बन गया है। कार्मिकों की रिलीविंग और पोस्टिंग को लेकर एक के बाद एक आदेश जारी हो रहे हैं, लेकिन सवाल वही—आदेश का पालन कब होगा ?
पहले आदेश निकला, फिर दूसरा आया, फिर तीसरा भी जारी करना पड़ा। यानी एक आदेश से काम नहीं चला तो दूसरा, दूसरे से बात नहीं बनी तो तीसरा… मगर जमीन पर हालात अब भी सवाल पूछ रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 23 जून तक कार्यमुक्त करने का निर्देश, फिर 4 जुलाई को दोबारा अनुपालन का आदेश और अब अगस्त में फिर तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पुलिस मुख्यालय के आदेशों को लागू कराने के लिए कितने आदेश और निकालने पड़ेंगे ?
मुख्यालय के आदेश में खुद लिखा है कि स्थानांतरण और संबद्धता समाप्त होने के बावजूद कार्मिकों को कार्यमुक्त न किए जाने से कार्य प्रभावित हो रहा है। कुंभ मेला, चारधाम समेत महत्वपूर्ण ड्यूटियों के लिए कार्मिकों की जरूरत बताई गई है।
तो फिर सवाल सीधा है—जब जरूरत इतनी गंभीर है तो कार्यमुक्ति के आदेशों को अमल में लाने में इतनी ‘दरियादिली’ क्यों ?
पदोन्नति से पोस्टिंग तक… आदेशों की फाइल मोटी, अमल पतला –
पदोन्नति हो, स्थानांतरण हो या पोस्टिंग—पुलिस मुख्यालय की ओर से आदेश तो समय-समय पर जारी होते रहे हैं। लेकिन अगर आदेशों के अनुपालन के लिए बार-बार याद दिलाने वाले आदेश निकालने पड़ें, तो फिर यह भी पूछना पड़ेगा कि पहले आदेश की ‘ताकत’ आखिर कितनी थी? अब शायद अगला चौथा आदेश यह बताने के लिए निकले कि पिछले तीन आदेशों का पालन क्यों नहीं हुआ।
अब देखने वाली बात यह है कि अगस्त वाला आदेश वास्तव में कार्मिकों को नवीन तैनाती पर भेजता है या फिर कुछ समय बाद पुलिस मुख्यालय को चौथा आदेश निकालकर अपने ही तीसरे आदेश की याद दिलानी पड़ेगी।
तीन पुलिस उपाधीक्षक पदोन्नति के बाद भी पोस्टिंग के इंतजार में, मुख्यालय की ‘आदेश व्यवस्था’ पर उठे सवाल –
पहले पदोन्नति के आदेश के लिए इंतजार करते रहे और अब पदोन्नति मिलने के बाद तैनाती के लिए इंतजार की बारी आ गई है। उत्तराखंड पुलिस के तीन पुलिस उपाधीक्षक पदोन्नत होने के बावजूद अभी तक नई तैनाती का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है कि जब पदोन्नति मिल चुकी है तो तैनाती के आदेश जारी करने में आखिर इतनी देरी क्यों?
एक तरफ स्थानांतरण के बाद कार्मिकों को रिलीव कराने के लिए तीन-तीन आदेश जारी किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारी देने के आदेश का इंतजार है। यानी कहीं आदेश पर आदेश, तो कहीं आदेश का इंतजार—पुलिस मुख्यालय की ‘कार्मिक व्यवस्था’ का यह अंदाज अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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