CM धामी के निर्देश पर EWS समेत सभी आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों की होगी जांच, फर्जीवाड़ा मिला तो रद्द होगा MBBS दाखिला !!

नीट यूजी-2026 की उत्तराखंड राज्य केंद्रीयकृत काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS सीट हासिल करने के मामले ने अब व्यापक जांच का रास्ता खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए EWS समेत सभी तरह की आरक्षित श्रेणियों का लाभ लेने वाले प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी या कूटरचित पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ प्रवेश भी रद्द किया जाएगा।

मामले की शुरुआत फ्रीडम फाइटर डिपेंडेंट कोटे से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायत से हुई थी। जांच के बाद कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए और उनके दाखिले निरस्त किए गए हैं। इसके बाद अब जांच का दायरा केवल एक आरक्षित श्रेणी तक सीमित न रखते हुए सभी श्रेणियों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन तक बढ़ाया जा रहा है।

EWS प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में

MBBS दाखिलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS कोटे के लाभ की पात्रता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ मामलों में आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चों को पारिवारिक संपत्ति अथवा आय की वास्तविक स्थिति से अलग दिखाकर EWS का लाभ दिलाने की कोशिश की गई हो सकती है। हालांकि, ऐसे मामलों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

सरकार के निर्देशों के बाद अब यह भी देखा जाएगा कि आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी वास्तव में निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं या नहीं। प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर उसके सत्यापन और काउंसलिंग में इस्तेमाल किए जाने तक की प्रक्रिया को जांच के दायरे में रखा जा सकता है।

फर्जी प्रमाणपत्र से सीट हासिल करने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार का स्पष्ट रुख है कि किसी भी गलत अथवा कूटरचित प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने वाले अभ्यर्थी को राहत नहीं दी जाएगी। पहले से सामने आए मामलों में जिला प्रशासन की जांच के बाद प्रमाणपत्र निरस्त किए गए हैं और संबंधित दाखिलों पर भी कार्रवाई हुई है।

नीट काउंसलिंग के प्रथम और द्वितीय चरण में हुए दाखिलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर भी प्रक्रिया सख्त की गई है। गलत प्रमाणपत्र सामने आने पर प्रवेश रद्द किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।

‘होनहार छात्रों का हक नहीं मरने देंगे’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेना भी गंभीर अनियमितता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण और अन्य श्रेणियों का लाभ केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मिले और किसी अपात्र अभ्यर्थी के कारण योग्य छात्र का अवसर प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब EWS, जाति, स्थायी निवास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित समेत सभी संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच पर जोर दिया जा रहा है।