आवास विभाग की आने वाली OTS (वन टाइम सेटलमेंट स्कीम) में सिर्फ आवासीय भवनों को ही मिलेगी छूट, कमर्शियल काम्प्लेक्स व व्यवसायिक गतिविधियों को नहीं मिलेगी इस बार राहत !!

उत्तराखंड में आगामी दिनों में प्रस्तावित वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनाव से पहले आने वाली इस योजना में सिर्फ आवासीय भवनों और आवासीय घरों को नियमितीकरण की छूट दिए जाने की तैयारी है। वहीं कमर्शियल भवन, दुकानें और व्यावसायिक प्रोजेक्ट OTS के दायरे से बाहर रह सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण के मामलों में लगातार सख्त रुख अपनाया है।अदालत ने मेरठ प्राधिकरण के एक मामले की सुनवाई में यह स्पष्ट किया है कि सिर्फ समय बीत जाने से कोई अवैध या अनधिकृत निर्माण वैध नहीं हो जाता। अधिकारियों की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं किया जाना भी अवैध निर्माण को वैधता देने का आधार नहीं बन सकता।

17 दिसंबर 2024 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नियमितीकरण की योजनाएं केवल असाधारण परिस्थितियों में और एक बार के उपाय के रूप में आवासीय घरों के लिए लाई जानी चाहिए। साथ ही अवैध निर्माण को नियमितीकरण के जरिए बढ़ावा देने से बचने पर जोर दिया गया था, और समस्त राज्यों को इस संबंध में निर्देश दिए गए थे।

उत्तराखंड में क्या होगा असर

सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों के मद्देनजर उत्तराखंड में प्रस्तावित OTS का फोकस आवासीय निर्माणों तक सीमित रहने की संभावना है। देहरादून समेत प्रदेश के प्रमुख शहरों में OTS का इंतजार कर रहे आवासीय भवन स्वामियों को इससे राहत मिल सकती है।

वहीं बिना स्वीकृत मानचित्र के बने कमर्शियल भवन, दुकानें और अन्य व्यावसायिक निर्माण इस प्रस्तावित राहत के दायरे में नहीं आने की स्थिति बन रही है। ऐसे निर्माणों को लेकर संबंधित विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों को मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई करनी पड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के मेरठ प्राधिकरण के मामले में भी अनधिकृत निर्माण और उसके नियमितीकरण को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तथा सख्त कार्रवाई पर जोर दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण को केवल लंबे समय तक बने रहने या अधिकारियों की निष्क्रियता के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

बता दें कि उत्तराखंड में OTS लाने को लेकर शासन स्तर पर पत्रावली गतिमान है लेकिन मौजूदा स्तिथि में सिर्फ आवासीय भवनों व घर को ही OTS के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। शासन के सूत्रों का मानना है कि कमर्शियल व व्यवसायिक भवनों को अगर OTS के दायरे में लाया जाता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगी।