देहरादून को जाम से मिलेगी बड़ी राहत: ₹4,030 करोड़ की एलिवेटेड इलेक्ट्रिक बस (e-BRTS) परियोजना को मिली सैद्धांतिक मंजूरी, मेट्रो की जगह अब E-BRTS चलाएगी सरकार !!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने और सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक रूप देने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। देहरादून में 31.52 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (e-BRTS) के निर्माण को बोर्ड की बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। ईपीसी (EPC) मोड में बनने वाले इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 4,030.89 करोड़ रुपये तय की गई है, जबकि ईएपी (EAP) मॉडल के तहत इसके पूरे होने तक कुल लागत 4,637.34 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

शहर के दोनों कोनों को जोड़ेंगे दो बड़े कॉरिडोर –

​इस परियोजना के तहत शहर के दो सबसे व्यस्त मार्गों पर एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किए जाएंगे, जिन पर कुल 35 एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे:

  • ​पहला कॉरिडोर (उत्तर-दक्षिण): यह रूट आईएसबीटी (ISBT) से मसूरी डायवर्जन तक 13.69 किलोमीटर लंबा होगा, जिस पर वाहनों के चढ़ने-उतरने के लिए 7 एंट्री और एग्जिट रैंप बनाए जाएंगे।
  • ​दूसरा कॉरिडोर (पूर्व-पश्चिम): यह रूट प्रेमनगर से रायपुर तक 17.82 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें 8 एंट्री और एग्जिट रैंप का प्रावधान रहेगा।
  • डबल-डेकर मार्ग: आराघर से चंचल डेयरी के बीच 1.7 किलोमीटर का हिस्सा डबल-डेकर एलिवेटेड रूट के रूप में तैयार किया जाएगा।

भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई योजना –

तकनीकी ऑडिट समिति (TAC) के अनुसार, दोनों मार्गों पर एलिवेटेड इलेक्ट्रिक बस चलाना सबसे बेहतर विकल्प पाया गया है। इसके साथ ही एक अहम सुरक्षा उपाय भी जोड़ा गया है। यदि भविष्य में बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिलते हैं और संचालन खर्च निकालना मुश्किल होता है, तो इस एलिवेटेड ट्रैक को सामान्य वाहनों के लिए भी खोला जा सकेगा। इसके लिए पूरे रूट पर कुल 15 रैंप बनाए जाएंगे, ताकि गाड़ियां आसानी से एलिवेटेड रोड से नीचे की सड़कों पर आ-जा सकें। इन 15 रैंपों के निर्माण और 6,567 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन व यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए 324 करोड़ रुपये का अलग से आकलन किया गया है। यदि इन सभी रैंपों को शामिल किया जाए, तो कुल लागत 4,355 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।

लागत और बजट का पूरा ब्यौरा

  • ​मूल निर्माण और सिस्टम की लागत: 2,848.61 करोड़ रुपये
  • ​जमीन, यूटिलिटी और पुनर्वास खर्च (उत्तराखंड सरकार द्वारा): 141.88 करोड़ रुपये
  • ​केंद्रीय जीएसटी (CGST) और राज्य जीएसटी (SGST): 499.38 करोड़ रुपये (प्रत्येक 249.69 करोड़ रुपये)
  • ​ई-बीआरटीएस की बेस लागत: 3,489.87 करोड़ रुपये
  • ​पीडब्ल्यूडी (PWD) की ओर से सड़क और बुनियादी ढांचे का काम: 541.02 करोड़ रुपये (इसमें सड़कों को चौड़ा करने, सुधारने, नाला और फुटपाथ निर्माण के 274.42 करोड़ रुपये तथा सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के 266.60 करोड़ रुपये शामिल हैं)
  • ​कुल बेस प्रोजेक्ट लागत: 4,030.89 करोड़ रुपये
  • ​15 रैंप जोड़ने के बाद कुल लागत: 4,355 करोड़ रुपये
  • प्रोजेक्ट पूर्णता लागत (EAP मॉडल): 4,637.34 करोड़ रुपये

प्रोजेक्ट की अगली प्रक्रिया

​बोर्ड ने निर्देश दिया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा प्रस्तावित 541.02 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्यों का पहले तकनीकी ऑडिट समिति (TAC) से वित्तीय परीक्षण (Financial Vetting) कराया जाएगा। इसके बाद इस पूरे प्रस्ताव को अंतिम वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) और उत्तराखंड सरकार के पास भेजा जाएगा। इस परियोजना के शुरू होने से प्रेमनगर से रायपुर और आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन की राह सुगम, तेज और जाम-मुक्त हो सकेगी।