सेतु आयोग के उपाध्यक्ष पद पर दो साल की कार्यवधि पूरी होने के बाद सरकार ने सेवा विस्तार देने के बजाय राज शेखर जोशी को पद से मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उनसे कैबिनेट स्तर का दर्जा और उससे जुड़ी सभी सुविधाएं भी वापस ले ली गई हैं। इस संबंध में शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सेतु आयोग में उपाध्यक्ष के रूप में राज शेखर जोशी की नियुक्ति निर्धारित 2 वर्ष की अवधि के लिए की गई थी। तय कार्यकाल पूरा होने के बाद शासन ने न केवल पद को रिक्त घोषित किया, बल्कि कैबिनेट मंत्री के समकक्ष मिलने वाली सुविधाएं—जैसे सरकारी वाहन, स्टाफ, आवास व अन्य प्रोटोकॉल—भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
सूत्रों का कहना है कि शासन अब इस पद पर नई नियुक्ति को लेकर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए जल्द ही किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी नाम की घोषणा नहीं की गई है।
गौरतलब है कि सेतु आयोग राज्य में नीतिगत सलाह और विकास योजनाओं के समन्वय में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में उपाध्यक्ष पद का खाली होना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, राज शेखर जोशी के कार्यकाल को लेकर राजनीतिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस अहम पद के लिए किसे चुनती है और आने वाले समय में सेतु आयोग की दिशा क्या रहती है।

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