उत्तराखंड में MBBS दाखिलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला अब लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए दाखिले का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा अब अन्य आरक्षित श्रेणियों और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों तक पहुंच गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला प्रशासन को अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए सूची भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में सामने आए मामले में चार MBBS दाखिले निरस्त किए जा चुके हैं। जांच में ऐसे प्रमाणपत्र सामने आए जिनमें जिस स्वतंत्रता सेनानी के नाम का उल्लेख था, उसका फर्जी पौत्र व वारिस दिखाकर कूटरचित आधार कार्ड के सहारे MBBS दाखिलें लिए गए। आवेदनों में दिए गए पतों का स्थलीय सत्यापन भी नहीं हो सका। इसके बाद जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर दाखिले निरस्त किए गए।
पूर्व SDM के कार्यकाल में जारी प्रमाणपत्र भी जांच की जद में –
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अब यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध प्रमाणपत्र किस अवधि में जारी हुए। सूत्रों के अनुसार पूर्व SDM के कार्यकाल में जारी किए गए एक अन्य स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में लिए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि यह प्रमाणपत्र भी इसी प्रकार से फर्जी बनाया गया था।

आरक्षित सीटों के प्रमाणपत्रों की भी होगी पड़ताल
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में गड़बड़ी सामने आने के बाद SC-ST सहित अन्य आरक्षित श्रेणियों से MBBS में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला प्रशासन को भेजी गई सूची में अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों के तहत MBBS सीट हासिल करने वाले अथवा दाखिले की प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। खासतौर पर स्थायी निवास और आरक्षण का लाभ लेने के लिए लगाए गए प्रमाणपत्रों की वैधता परखी जा रही है।
चार दाखिले रद्द, पांच के खिलाफ मुकदमा
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से जुड़े मामले में चार छात्राओं के MBBS दाखिले रद्द किए जा चुके हैं। इसके साथ ही देहरादून के क्लेमेंटाउन और रायपुर थानों में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर ऑनलाइन आवेदन और प्रमाणपत्र हासिल करने तक की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच में ऑनलाइन आवेदन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी अहम माने जा रहे हैं। आवेदन में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, ईमेल, अपलोड किए गए दस्तावेज और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड की पड़ताल से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अलग-अलग आवेदनों के पीछे कोई समान कड़ी तो नहीं है।
मोटी रकम लेकर सीट दिलाने वाले नेटवर्क पर नजर
जांच आगे बढ़ने के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फर्जी प्रमाणपत्र केवल अभ्यर्थियों द्वारा तैयार कराए गए या इसके पीछे MBBS सीट दिलाने के नाम पर रकम लेने वाला कोई संगठित नेटवर्क भी सक्रिय था। पुलिस और प्रशासनिक जांच में दस्तावेज तैयार कराने, प्रमाणपत्र जारी कराने और काउंसलिंग में उनका इस्तेमाल करने के बीच की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सरकार की भी पूरे प्रकरण पर नजर
MBBS दाखिलों से जुड़े इस प्रकरण में अब जांच का दायरा केवल चार निरस्त दाखिलों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के बाद अन्य आरक्षित श्रेणियों और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच से आने वाले दिनों में और मामले सामने आने की संभावना बनी हुई है।

