जनपद देहरादून में प्रशासनिक आदेशों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में जिस संग्रह अमीन दीपक नेगी को उनके मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश देते हुए कलेक्ट्रेट से कार्यमुक्त किया गया था, उसी कर्मचारी को महज 13 दिन बाद अपर जिलाधिकारी (वि/रा) कार्यालय से जारी आदेश के माध्यम से पुनः कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया।
अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिलाधिकारी के आदेश में संशोधन अथवा उसे प्रभावहीन करने के लिए सक्षम स्तर से कोई अनुमोदन लिया गया था? यदि नहीं, तो फिर जिलाधिकारी द्वारा कार्यमुक्त किए गए कर्मचारी को पुनः सम्बद्ध करने का अधिकार किस आधार पर प्रयोग किया गया?
सवाल यह भी है क्या अभी भी पूर्व जिलाधिकारी के इशारों पर जिला प्रशासन में सेंधमारी कर हस्तक्षेप किया जा रहा है ?

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