बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी (CEO) के कार्यकाल में लिए गए कई फैसले अब विवादों का कारण बनते जा रहे हैं। हाल के दिनों में समिति की कार्यप्रणाली लगातार सुर्खियों में रही है। बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर जनरेटर खरीदने के आरोप हों या वीवीआईपी नेताओं को समिति के खर्च पर होटल में ठहराने का मामला, कई प्रकरणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार समिति के अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष की अनुमति के बिना कई वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय लिए गए, जिनका खामियाजा अब समिति और नए CEO को भुगतना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि पुराने मामलों की फाइलें खुलने के बाद कई स्तरों पर जवाब तलाशे जा रहे हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब होटल में ठहराए गए कुछ नेताओं ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि उन्होंने अपने होटल और कमरों का भुगतान स्वयं किया था, बावजूद इसके उनके नाम से समिति में वाउचर दर्शाकर भुगतान निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित धनराशि आखिर किसे दी गई।
समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ माह पूर्व वर्तमान BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के संज्ञान में भी ऐसे मामले आए थे। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कड़ा चेतावनी पत्र जारी किया था।

इधर, लगातार सामने आ रहे मामलों और बढ़ते विवादों के बीच शासन स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार इन प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए जल्द कोई बड़ा निर्णय ले सकती है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

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