देहरादून में जिलाधिकारी पद से कार्यमुक्त होने से ठीक पहले किए गए 9 कर्मचारियों के तबादले अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। पूर्व जिलाधिकारी संविन बंसल द्वारा जारी किए गए इन तबादलों को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात यह है कि तबादलों की सूची में वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्हें जिलाधिकारी का करीबी माना जाता था।
इनमें वह अमीन भी शामिल है जो लंबे समय से जिलाधिकारी आवास में CPO से जुड़े कार्यों को देख रहा था। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि ये कर्मचारी बेहतर कार्य कर रहे थे तो इन्हें नए जिलाधिकारी के लिए क्यों नहीं छोड़ा गया, ताकि उनके अनुभव का लाभ नई व्यवस्था को मिल पाता। वहीं यदि कर्मचारियों के कार्य में कोई कमी थी तो फिर उन्हें अंतिम दिन तक महत्वपूर्ण व संवेदनशील पटलों पर क्यों बनाए रखा गया।
तबादलों की प्रक्रिया को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि अमीन का तबादला स्थापना पटल से किया गया, जबकि सामान्यतः अमीनों के तबादले संग्रह से किए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि तय प्रक्रिया से अलग कदम उठाना पड़ा।
इसके अतिरिक्त अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कार्यालय में पहले से तय मानकों की तुलना में अधिक संख्या में अमीन और कर्मचारियों की तैनाती भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट सिटी लिमिटेड में सेवानिवृत्ति के बाद एक वर्ष के अनुबंध पर रखे गए एक कर्मचारी ने भी IAS अधिकारियों की तबादला सूची जारी होने के तुरंत बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम को भी प्रशासनिक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल इन तबादलों को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर अंतिम समय में इतने बड़े स्तर पर फेरबदल की आवश्यकता क्यों पड़ी।




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