एक तरफ उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात सुधारों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे देहरादून पहुंचे हैं और सोमवार को शासन, पुलिस व परिवहन विभाग के आला अफसरों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी दून से लेकर मसूरी तक ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह हांफ चुकी है।
लगातार छुट्टियों और वीकेंड के चलते दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में सैलानी देहरादून व मसूरी का रुख कर रहे हैं। हजारों बाहरी वाहनों के दून में प्रवेश करते ही पूरा शहर जाम के भंवर में फंस गया। आईएसबीटी से लेकर सहारनपुर चौक, रिस्पना, घंटाघर, जाखन और राजपुर रोड होते हुए मसूरी डायवर्जन तक की सभी प्रमुख सड़कें पैक नजर आईं। कई किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारों में एंबुलेंस से लेकर रोजमर्रा के सफर पर निकले स्थानीय लोग और पर्यटक घंटों फंसे रहे। शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल और पुलिस का डाइवर्जन प्लान दबाव के आगे बेबस साबित हुआ।
एक माह से खाली पड़ा है एसपी ट्रैफिक का पद –
सड़कों पर मचे इस त्राहिमाम के बीच सबसे बड़ा सवाल महकमे की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। पर्यटन सीजन और भारी यातायात दबाव के दौर में देहरादून जैसे संवेदनशील जिले में पिछले करीब एक महीने से ‘एसपी ट्रैफिक’ (पुलिस अधीक्षक यातायात) का पद खाली पड़ा हुआ है। शहर के यातायात की रीढ़ माने जाने वाले इस पद पर किसी पीपीएस या फिर आईपीएस अधिकारी की तैनाती के लिए पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने अब तक शासन को प्रस्ताव ही नहीं भेजा है। मुख्यालय स्तर पर बरती जा रही इस ढिलाई का सीधा असर राजधानी की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।
खुद सड़कों पर मोर्चा संभालने को मजबूर एसएसपी –
जिले में समर्पित एसपी ट्रैफिक न होने के चलते व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का पूरा दारोमदार एसएसपी देहरादून पर आ टिका है। शहर को महाजाम से मुक्ति दिलाने और यातायात को पटरी पर लाने के लिए एसएसपी को खुद ग्राउंड जीरो पर उतरना पड़ रहा है। वे प्रमुख चौराहों और मसूरी मार्ग पर खड़े होकर ट्रैफिक डायवर्जन व वाहनों की आवाजाही की सीधी मॉनिटरिंग करने को मजबूर हैं।

