उत्तराखंड में नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने और नशे के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए धामी सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रदेश में नशा तस्करी से जुड़े मामलों की निगरानी, जांच और कार्रवाई के लिए अलग से नारकोटिक्स निदेशालय गठित करने और विशेष नारकोटिक्स थाने खोलने की कवायद शुरू हो गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर गृह विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित नारकोटिक्स निदेशालय की कमान एसएसपी अथवा डीआईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी जा सकती है। मूल प्रस्ताव में निदेशालय के लिए एक से दो एएसपी, दो सीओ और दो से तीन इंस्पेक्टर सहित करीब 25 से 30 नए पद सृजित करने की योजना है। इसके साथ ही वर्तमान में एसटीएफ के अंतर्गत कार्यरत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को अलग कर प्रस्तावित निदेशालय के अधीन लाने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ऊधमसिंह नगर में खुलेगा पहला नारकोटिक्स थाना –
निदेशालय के गठन के साथ ही प्रदेश का पहला नारकोटिक्स थाना ऊधमसिंह नगर में खोलने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, थाने की कमान इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी के हाथों में होगी। आवश्यकता और कार्यभार के आधार पर दूसरे चरण में प्रदेश के अन्य जनपदों में भी ऐसे थाने खोले जा सकते हैं।
करीब 70 पदों के सृजन का प्रस्ताव –
प्रस्ताव के तहत निदेशालय और नारकोटिक्स थानों के लिए कुल मिलाकर करीब 70 पद सृजित करने की तैयारी है। हालांकि, पदों की वास्तविक संख्या वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी। अब प्रस्ताव पर कार्मिक एवं वित्त विभाग की सहमति महत्वपूर्ण होगी। संबंधित विभागों की मंजूरी के बाद ही निदेशालय के ढांचे, पदों की संख्या और थानों के विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
बता दें कि धामी सरकार की इस प्रस्तावित पहल का उद्देश्य प्रदेश में नशा तस्करी के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के प्रयासों को मजबूत करना है।

