उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल की बैठक में ‘उत्तराखण्ड वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली, 2026’ के प्रख्यापन को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस नई नियमावली के अस्तित्व में आने से मलेरिया व अन्य वैक्टर जनित रोग संवर्ग के कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों को नया व विधिसम्मत कानूनी आधार मिलेगा। इसके साथ ही राज्य गठन के बाद से चली आ रही उत्तर प्रदेश की दशकों पुरानी नियमावलियों पर निर्भरता भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
यूपी के नियमों से चल रहा था संवर्ग, अब बनी राज्य की अपनी नियमावली
राज्य गठन के पश्चात से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को आवंटित मलेरिया संवर्ग के कार्मिकों की भर्ती और सेवा शर्तों का नियमन ‘उत्तर प्रदेश मलेरिया अराजपत्रित सेवा नियमावली, 1993’ तथा ‘उत्तर प्रदेश मलेरिया राजपत्रित अधिकारी (समूह-ख) सेवा नियमावली, 1993 (यथा संशोधित 1997)’ के तहत ही किया जा रहा था।
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1953 से चले आ रहे राष्ट्रीय मलेरिया कार्यक्रम का विस्तार करते हुए वर्ष 2004 में इसे राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) का स्वरूप दिया गया था। इसके तहत केवल मलेरिया ही नहीं, बल्कि डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, कालाजार और लिम्फेटिक फाइलेरियासिस जैसी घातक बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण को भी शामिल किया गया।
दायित्वों के इस विस्तार के बाद उत्तराखंड शासन ने 19 मार्च 2012 को एक शासनादेश जारी कर पदों के नाम तो बदल दिए थे, लेकिन नियमावली में इसका विधिवत समावेश नहीं हो पाया था। नई सेवा नियमावली 2026 लागू होने से प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता, सेवा संबंधी स्पष्टता और संवर्ग में भर्ती-पदोन्नति का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
बदले गए थे ये पदनाम
शासनादेश के तहत मलेरिया संवर्ग के पदों को नई जिम्मेदारियों के अनुरूप नया नाम दिया गया था, जिसे अब विधिवत नियमावली में दर्ज किया गया है:
- जिला मलेरिया अधिकारी से जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी
- सहायक मलेरिया अधिकारी से सहायक जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी
- वरिष्ठ / ज्येष्ठ मलेरिया अधिकारी से वरिष्ठ / ज्येष्ठ वैक्टर निरीक्षक
- मलेरिया निरीक्षक से वैक्टर निरीक्षक
- कीट विज्ञान सहायक (अवर श्रेणी) के पदनाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है
कुल 38 में से 31 पद खाली, युवाओं व कार्मिकों को मिलेगा लाभ
वर्तमान में इस संवर्ग में कुल 38 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 7 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 31 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। नई नियमावली के तहत इन पदों पर सीधी भर्ती और पदोन्नति की व्यवस्था तय कर दी गई है:

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
पहाड़ी व मैदानी दोनों क्षेत्रों में डेंगू और अन्य मौसमी वैक्टर जनित बीमारियों का प्रकोप लगातार चुनौती बनता रहा है। कीट विज्ञान सहायकों और वैक्टर निरीक्षकों के सभी पदों के खाली होने से जमीनी स्तर पर निगरानी प्रभावित हो रही थी। नई नियमावली प्रख्यापित होने से जहां सेवारत कर्मियों की पदोन्नति की अड़चनें दूर होंगी, वहीं वैक्टर निरीक्षक और सहायक अधिकारियों के पदों पर सीधी भर्ती से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

