केंद्र सरकार के हालिया दो बड़े फैसलों ने उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। खासकर वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के बीच इन फैसलों को भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। एक फैसले ने जहां यह साफ कर दिया है कि विशेष परिस्थितियों में दूसरे कैडर के अधिकारी को भी किसी राज्य में शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जा सकती है, वहीं दूसरे आदेश में 1995 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारियों को केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार ने राजस्थान कैडर के 1995 बैच के IAS अधिकारी राजीव सिंह ठाकुर की मणिपुर कैडर में इंटर-कैडर डेपुटेशन को मंजूरी दी है। नियुक्ति समिति (ACC) ने निर्धारित इंटर-कैडर डेपुटेशन नीति में छूट देते हुए यह मंजूरी दी है। ठाकुर को मणिपुर का मुख्य सचिव बनाया गया है और उनका डेपुटेशन 30 जून 2029 तक रहेगा।
इस फैसले ने ब्यूरोक्रेसी में एक अहम संदेश दिया है—विशेष परिस्थितियों में कैडर से बाहर जाकर भी किसी अधिकारी को राज्य के शीर्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यानी भविष्य में किसी राज्य में मुख्य सचिव या पुलिस महानिदेशक जैसे शीर्ष पदों पर दूसरे कैडर के अधिकारी की नियुक्ति की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, इसके लिए संबंधित नियमों में छूट और केंद्र की मंजूरी अहम होगी।
1995 बैच के IPS को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारियां –
इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से 1995 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारियों को लेकर भी बड़ा आदेश जारी हुआ है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र की विभिन्न पुलिस/सुरक्षा एजेंसियों में Special DG स्तर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं जून 2026 में 1995 बैच के 30 IPS अधिकारियों समेत कुल 33 अधिकारियों को केंद्र में DG/DG-equivalent पदों के लिए empanel किया गया था।
इन फैसलों के बीच उत्तराखंड के वरिष्ठ IPS अधिकारियों को लेकर भी खूब चर्चा रही। उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रदेश के किसी वरिष्ठ अधिकारी को इस स्तर की केंद्रीय जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, हालिया सूची में उत्तराखंड के अधिकारी को जगह नहीं मिली।
अब अगली सूची का इंतजार –
ऐसे में ब्यूरोक्रेसी में चर्चा यह भी है कि केंद्रीय स्तर पर अगली सूची कब आती है और उसमें उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारियों में से किसका नंबर लगता है। फिलहाल केंद्रीय तैनाती की संभावनाओं पर नजर लगाए बैठे अधिकारियों के लिए अगली सूची ही अगली उम्मीद बन गई है।
यानी एक तरफ केंद्र ने यह रास्ता खोल दिया है कि जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार दूसरे कैडर का अधिकारी भी किसी राज्य की कमान संभाल सकता है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय पुलिस संगठनों में वरिष्ठ IPS अधिकारियों को शीर्ष पदों पर जगह मिलने का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में इन दोनों फैसलों को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।

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