उत्तराखंड में जमीनों की वर्चुअल रजिस्ट्री की तैयारी तेज, जल्द होगी नई प्रक्रिया लागू, घर बैठे होंगे कई काम आसान !!

उत्तराखंड में जमीन, मकान और अन्य परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया जल्द ही पूरी तरह डिजिटल और वर्चुअल माध्यम से होने जा रही है। सरकार की तैयारी है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को पेपरलेस और ऑनलाइन बनाया जाए, जिससे लोगों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-केवाईसी और डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री कराई जा सकेगी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम लोगों को सबसे बड़ा फायदा समय और खर्च की बचत के रूप में मिलेगा। अभी रजिस्ट्री के लिए कई बार तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालय जाना पड़ता है, लेकिन वर्चुअल प्रणाली आने के बाद अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी हो जाएगी। राज्य से बाहर रहने वाले लोग भी बिना उत्तराखंड आए अपनी संपत्ति की खरीद-बिक्री कर सकेंगे। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार आधारित प्रमाणीकरण, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े और विवादों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। भूमि रिकॉर्ड विभिन्न विभागों के बीच ऑनलाइन साझा होने से दस्तावेज सत्यापन भी तेजी से हो सकेगा।

बताया जा रहा है कि वर्चुअल रजिस्ट्री प्रणाली में लोगों को तीन विकल्प मिल सकते हैं। पहला, पारंपरिक तरीके से कार्यालय पहुंचकर रजिस्ट्री। दूसरा, कार्यालय में पेपरलेस रजिस्ट्री। तीसरा, पूरी तरह ऑनलाइन वर्चुअल रजिस्ट्री, जिसमें वीडियो कॉल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होगी।

नई प्रणाली में संपत्ति चयन, दस्तावेज अपलोड, ई-हस्ताक्षर, डिजिटल सत्यापन और स्टांप शुल्क भुगतान भी ऑनलाइन होगा। इसके बाद विभाग समय निर्धारित करेगा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रजिस्ट्री पूरी की जाएगी। इससे सरकारी कामकाज में डिजिटल बदलाव के साथ लोगों को तेज और आसान सेवा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

फिलहाल विभाग इस पूरी प्रणाली को लागू करने में आने वाले खर्च, तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा मानकों पर मंथन कर रहा है, क्रम में वित्त विभाग की ओर से हाल ही में निदेशक ITDA को पत्र लिखा गया है। अधिकारियों के स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया को किस प्रकार पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए, ताकि फर्जी दस्तावेज, पहचान की चोरी और साइबर धोखाधड़ी जैसी आशंकाओं पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए मल्टी लेयर वेरिफिकेशन, आधार आधारित प्रमाणीकरण, वीडियो रिकॉर्डिंग, डिजिटल सिग्नेचर और सुरक्षित सर्वर सिस्टम का इस्तेमाल किए जाने पर चर्चा चल रही है। साथ ही डेटा सुरक्षा और रिकॉर्ड के बैकअप को लेकर भी विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में दस्तावेज सुरक्षित रह सकें।