कैबिनेट भेजे जाने वाले प्रस्तावों में लापरवाही पर सख्त हुआ शासन, मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जारी किए कड़े निर्देश !!

उत्तराखंड शासन ने मंत्रिमंडल बैठकों में भेजे जाने वाले प्रस्तावों और मंत्रिमंडलीय टिप्पणियों में लगातार सामने आ रही खामियों को गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में कैबिनेट के समक्ष भेजे जाने वाले प्रस्ताव पूरी तैयारी और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही प्रस्तुत किए जाएं।

मुख्य सचिव की ओर से सात मई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि 19 जून 2025 को जारी सचिवालय निर्देशों के बावजूद विभिन्न विभागों की ओर से भेजे जा रहे प्रस्तावों में कई प्रकार की त्रुटियां सामने आ रही हैं। इससे न केवल कैबिनेट कार्यवाही प्रभावित हो रही है, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी अनावश्यक विलंब उत्पन्न हो रहा है।

पत्र में विभागों द्वारा की जा रही प्रमुख कमियों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। शासन ने पाया कि कई प्रस्तावों में विषय स्पष्ट नहीं होता, प्रस्ताव का उद्देश्य अधूरा रहता है तथा परामर्शी विभागों की राय का उल्लेख तक नहीं किया जाता। कई मामलों में यदि परामर्शी विभाग प्रस्ताव से सहमत नहीं होता, तब भी संबंधित विभाग की स्पष्ट टिप्पणी संलग्न नहीं की जाती।

इसके अलावा कई प्रस्ताव बिना विधिवत परीक्षण के नियमावली, विधेयक और अन्य दस्तावेजों के साथ भेज दिए जाते हैं। शासन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि कुछ प्रस्ताव विभागीय मंत्री और विभागीय सचिव के हस्ताक्षर के बिना ही मंत्रिमंडल के लिए उपलब्ध करा दिए जाते हैं।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि विभागों द्वारा कैबिनेट के आदेशों के अनुपालन आख्या समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जबकि ई-कैबिनेट पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले प्रस्तावों में भी गंभीर कमियां पाई जा रही हैं। कई बार परामर्शी विभागों की नोटशीट संलग्न नहीं की जाती और जरूरी दस्तावेजों को ठीक प्रकार अटैच तक नहीं किया जाता।

शासन ने प्रेस नोट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र में कहा गया है कि विभागों की ओर से भेजे जाने वाले प्रेस नोट संक्षिप्त, स्पष्ट और सहज भाषा में नहीं होते, जिससे आमजन तक निर्णयों की सही जानकारी पहुंचाने में कठिनाई होती है।

कैबिनेट बैठक से सात दिन पहले भेजने होंगे प्रस्ताव –

मुख्य सचिव द्वारा पूर्व में जारी 19 जून 2025 के निर्देशों का भी पत्र में हवाला दिया गया है। उसमें स्पष्ट कहा गया था कि मंत्रिमंडल की बैठक से कम से कम सात दिन पूर्व प्रस्ताव मंत्रिपरिषद विभाग को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्ताव पर संबंधित परामर्शी विभागों की राय और विभागीय मंत्री की स्वीकृति प्राप्त हो।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित समयसीमा के बाद प्राप्त प्रस्तावों पर आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही विलंब से प्रस्ताव स्वीकार किए जाएंगे और उसका कारण प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा।

अनुपस्थित रहने वाले सचिवों को देनी होगी पूर्व सूचना –

मुख्य सचिव ने यह भी कहा है कि कई बार कैबिनेट बैठक में संबंधित विभागीय सचिव अनुपस्थित रहते हैं, जिससे चर्चा के दौरान असमंजस की स्थिति बन जाती है। इसे देखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी कारणवश सचिव बैठक में उपस्थित नहीं हो सकते, तो कम से कम एक दिन पूर्व इसकी लिखित सूचना उपलब्ध कराई जाए।

सभी विभागों को चेतावनी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट कहा है कि भविष्य में कैबिनेट के समक्ष भेजे जाने वाले प्रस्तावों और टिप्पणियों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रस्तावों को पूरी तरह परीक्षण और अनुमोदन के बाद ही ई-पत्रावली एवं ई-कैबिनेट पोर्टल पर अपलोड कर मंत्रिपरिषद विभाग को भेजा जाए।