IPS अधिकारी अरुण मोहन जोशी व नीरू गर्ग को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने इस प्रकरण में अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार के आदेशों के क्रियान्वयन पर फिलहाल अंतरिम रूप से रोक लगा दी है।
अधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आवेदक का पक्ष मजबूत प्रतीत होता है। साथ ही यह भी माना गया कि यदि आदेशों को लागू किया गया तो संबंधित अधिकारी को सेवा स्थिति और पद के नुकसान के रूप में अपूरणीय क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं होगी। वहीं, आदेशों पर अस्थायी रोक से राज्य सरकार को कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा। CAT ने यह भी कहा है कि इन अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर PAY प्रोटेक्शन मिलेगा या नहीं यह भी अभी स्पष्ठ नहीं है, जिसपर भी आगामी तारीखों में चर्चा करनी होगी।
CAT ने 5 मार्च 2026 को जारी आदेश और 6 मार्च 2026 के रिलीविंग/डिस्चार्ज आदेश सहित उनसे जुड़े सभी परिणामी कार्यों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
इसके साथ ही CAT ने उत्तराखंड राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करे और सभी संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे। इसके बाद, यदि आवश्यक हुआ तो दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर (रीजॉइंडर) दाखिल किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 7 मई 2026 को निर्धारित की गई है। अब इस फैसले के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल शासन को उक्त आदेश आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है। प्राप्त होने के बाद ही इस प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा कि दोनों अधिकारियों का आगामी तारीख तक क्या किया जाएगा।
इन मामलों के जानकार बताते हैं कि ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय आने से भविष्य में नजीर पेश होगी व हर अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी ऐसे मामलों में CAT का उक्त आदेश का सहारा ले सकता है। जिस क्रम में अब MHA व DOPT भी आगामी तारीखों में इस मामले में बड़े दांवपेंचों के साथ कूद सकता है।

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