प्रदेश में लंबित राजस्व वादों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए धामी सरकार ने अहम कदम उठाया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों के तहत आगामी 28 मार्च 2026 को पूरे उत्तराखंड में “राजस्व लोक अदालत” का आयोजन किया जाएगा।
शासन से जारी पत्र में सभी जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों, सहायक कलेक्टरों एवं तहसीलदारों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में लिया गया है, ताकि आमजन को राजस्व मामलों में शीघ्र न्याय मिल सके।
त्वरित समाधान पर सरकार का फोकस
शासन ने स्पष्ट किया है कि राजस्व लोक अदालत के माध्यम से लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि प्रस्तावित राजस्व लोक अदालत में मुख्यमंत्री स्वयं भी किसी भी स्थान से प्रतिभाग कर सकते हैं। आयोजन की तिथि एवं समय के संबंध में पृथक से सूचना जारी की जाएगी।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें और लंबित मामलों की समीक्षा कर सूची तैयार करें। शासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यवाही में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आमजन को मिलेगा सीधा लाभ
राजस्व लोक अदालत के आयोजन से भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन जैसे मामलों में आमजन को त्वरित राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी।



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