राज्य गठन के छब्बीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड पुलिस अब एक बिल्कुल नए कलेवर और नई पहचान के साथ नजर आने वाली है। आगामी छह नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देहरादून के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे उत्तराखंड पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ से सम्मानित करेंगे और इसी ऐतिहासिक मौके पर पुलिस के नए प्रतीक चिन्ह व नए ध्येय वाक्य का विधिवत अनावरण भी किया जाएगा। इस बड़े बदलाव के साथ ही दशकों से चला आ रहा ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ का ध्येय वाक्य अब इतिहास का हिस्सा बन जाएगा और इसकी जगह संस्कृत के तीन प्रभावशाली शब्दों ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ को पुलिस का नया मूल मंत्र बनेगा।
‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ से लेकर ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ तक का सफर
शुरुआत में ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ ध्येय वाक्य के साथ उत्तराखंड पुलिस ने अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश की थी और सेवा व सुरक्षा के रूप में कई मायनों में पुलिस ने इसे सिद्ध भी किया। हालांकि, पुलिस को सबसे ज्यादा पहचान ‘मित्र पुलिस’ के रूप में मिली, लेकिन पुलिस के इस मित्रवत व्यवहार का असर इतना हुआ कि कई बार लोगों ने इसका अलग ही मतलब निकालना शुरू कर दिया और कई मोर्चे ऐसे भी आए जहां पुलिस को केवल ‘मित्र पुलिस’ ही कहा जाने लगा। यही वजह है कि अब छब्बीस साल बाद पुलिस को इस पुरानी छवि से आगे ले जाते हुए कर्म, सत्य और शौर्य की एक नई पहचान दी जा रही है।
नए प्रतीक चिन्ह और लॉरेल रीथ की खासियत
उत्तराखंड पुलिस के इस नए प्रतीक चिन्ह की बनावट बेहद खास और अर्थपूर्ण है, जिसमें बीचों-बीच हिमालय की चोटियों और बहती हुई नदी को शौर्य के प्रतीक ‘लॉरेल रीथ’ यानी तेजपत्ते की पत्तियों की माला के भीतर दर्शाया गया है। तेजपत्ते की इस माला को विजय, गौरव, सम्मान और सत्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन ग्रीक तथा रोमन संस्कृति में ओलंपिक विजेताओं, वीरता दिखाने वाले योद्धाओं और महान विद्वानों को उनके असाधारण कार्यों के लिए यही माला पहनाई जाती थी। महकमे के नए प्रतीक चिन्ह में इसे जगह देने का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था को कायम रखने में पुलिस के गौरवशाली इतिहास, साहस और समाज के प्रति उनके सेवा व समर्पण भाव को प्रदर्शित करना है।

वर्दी, टोपी और छाती के इंसिनिया में क्या होगा नया बदलाव?
पुलिस के प्रतीक चिन्ह और ध्येय वाक्य में बदलाव को लेकर विभाग के भीतर पिछले काफी समय से विचार-विमर्श चल रहा था। इसी बीच गत अप्रैल में जब दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों की पुलिस की तर्ज पर उत्तराखंड पुलिस को भी ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ दिए जाने की घोषणा हुई, तो इसके स्वरूप को तैयार करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक विशेष समिति बनाई गई। इसी समिति को लाल और नीले रंगों से सजे राष्ट्रपति पुलिस कलर के साथ-साथ नया लोगो, बेल्ट और आर्म बैज आदि डिजाइन करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जिसे अधिकृत सूत्रों के अनुसार अब अंतिम रूप दिया जा चुका है।
इस बदलाव के तहत जो नया प्रतीक चिन्ह तैयार किया गया है, वह पुलिसकर्मियों की बेल्ट और टोपी पर सिल्वर की धातु में दिखाई देगा, जबकि नया रंगीन निशान यानी इंसिनिया वर्दी पर छाती पर लगाया जाएगा। इसके अलावा, पहले बाजू में जो प्रतीक चिन्ह लगता था, उसके रंग और बैकग्राउंड में भी बदलाव किया गया है और अब वह पहले के आसमानी नीले रंग की जगह लाल और नीले रंग में दिखेगा।

