जन्म से शिक्षा तक बच्चों की डिजिटल ट्रैकिंग की तैयारी, सभी पोर्टलों के इंटीग्रेशन पर जोर !!

राज्य में बच्चों से जुड़ी सभी सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में सरकार ने ठोस पहल शुरू कर दी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक प्रत्येक बच्चे की डिजिटल ट्रैकिंग के लिए एकीकृत सिस्टम विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के पोर्टलों को आपस में जोड़ा जाएगा।

बैठक में नियोजन विभाग ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि प्रस्तावित ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए हर बच्चे का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। इससे न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बैठक में बताया कि केंद्र सरकार के ‘पोषण ट्रैकर’ के माध्यम से पहले से ही गर्भवती महिलाओं और 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों का पंजीकरण किया जा रहा है। इस पोर्टल पर बच्चों की उपस्थिति, पोषण स्थिति और टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाता है, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो पाती है।

बैठक में यह महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आया कि राज्य सरकार के फैमिली आईडी आधारित ‘देवभूमि पहचान पत्र’ को इस पूरी व्यवस्था से जोड़ा जाए। इसके तहत नवजात बच्चों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने और जन्म प्रमाण पत्र को आधार से लिंक करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इससे हर बच्चे की यूनिक पहचान सुनिश्चित होगी और ट्रैकिंग सिस्टम अधिक प्रभावी बनेगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय की एपीएएआर आईडी (APAAR) योजना के तहत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की डिजिटल आईडी दी जा रही है। इस आईडी के जरिए छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड स्कूल से लेकर कॉलेज तक ट्रैक किया जा सकता है, भले ही वह किसी अन्य राज्य या संस्थान में स्थानांतरित हो जाए।

स्वास्थ्य विभाग ने बैठक में जानकारी दी कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत एबीएचए आईडी (ABHA) के माध्यम से मरीजों का हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा एचएमआईएस (HMIS) पोर्टल पर जन्म और टीकाकरण से जुड़ा डेटा पहले से ही दर्ज किया जा रहा है, जिसे नए सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा।

15 दिन में मांगा पूरा डेटा, इंटीग्रेशन पर होगी अगली बैठक– मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर एकत्र किए जा रहे बच्चों के पंजीकरण से संबंधित डेटा को 15 दिनों के भीतर आईटीडीए को उपलब्ध कराएं। इसके बाद एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी पोर्टलों की इंटर-ऑपरेबिलिटी और इंटीग्रेशन पर निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जन्म प्रमाण पत्र को आधार से लिंक करने के संबंध में यूआईडीएआई से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए जाएं, ताकि इस प्रक्रिया को जल्द लागू किया जा सके।

बैठक में अधिकारियों ने माना कि यदि यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाता है, तो बच्चों से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच और अधिक सटीक व प्रभावी हो सकेगी।