उत्तराखंड पुलिस के लिए गर्व का क्षण है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, राज्य पुलिस को ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’s पुलिस कलर’ (President’s Police Colour) प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह सम्मान देश की उन चुनिंदा पुलिस इकाइयों को दिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक उत्कृष्ट सेवा, साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि महामहिम राष्ट्रपति ने उत्तराखंड पुलिस को यह प्रतिष्ठित सम्मान देने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही राज्य पुलिस अब उन विशिष्ट बलों की श्रेणी में शामिल हो जाएगी, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च पुलिस सम्मान प्राप्त है।
क्या होता है ‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर’?
‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर’ किसी भी पुलिस बल के लिए सर्वोच्च औपचारिक सम्मान होता है। यह एक विशेष ध्वज (Colour) होता है, जिस पर बल का प्रतीक चिन्ह और उपलब्धियों का गौरव अंकित रहता है। यह सम्मान पुलिस की उत्कृष्ट सेवा, वीरता, आंतरिक सुरक्षा में योगदान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए दिया जाता है। बता दें कि अभी तक सिर्फ 15 राज्यों को ही राष्ट्रपति पुलिस कलर मिला है।
पुलिस बलों, केंद्रीय पुलिस संगठनों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ देश का एक अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। यह सम्मान किसी भी पुलिस संगठन की बहादुरी, उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और मानवीय कार्यों में योगदान की सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता है। इस सम्मान को प्राप्त करना न केवल उस बल के लिए गौरव का विषय होता है, बल्कि इससे पूरे संगठन का मनोबल भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है।
इतिहास में गहरी जड़ें
भारतीय परंपरा में ‘कलर्स’ या ‘स्टैंडर्ड्स’ को ध्वज या पताका के रूप में जाना जाता रहा है, जिसकी जड़ें वेदों और पुराणों तक जाती हैं। प्राचीन काल में राजा और सम्राट अपनी सेनाओं के साथ ध्वज लेकर चलते थे। युद्ध के दौरान यदि किसी सेना का ध्वज शत्रु के हाथ लग जाता था तो इसे अपमान माना जाता था, जबकि शत्रु का ध्वज प्राप्त करना विजय और सम्मान का प्रतीक होता था।
कड़े मानकों पर होता है चयन
राष्ट्रपति पुलिस कलर के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कठोर होती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस के लिए निर्धारित पात्रता के अनुसार—
- पुलिस बल का अस्तित्व कम से कम 15 वर्ष पुराना होना चाहिए।
- आदर्श पुलिस अधिनियम को अपनाया गया हो।
- बल का अपना आधिकारिक प्रतीक चिन्ह हो।
इसके अलावा अनुशासन, सेवा रिकॉर्ड, वीरता और समग्र पेशेवर दक्षता जैसे पहलुओं का भी गहन मूल्यांकन किया जाता है।
भव्य परेड के साथ होता है सम्मान समारोह – यह सम्मान एक औपचारिक और भव्य परेड के माध्यम से प्रदान किया जाता है, जिसमें 100 से 500 कार्मिकों की बटालियन स्तर की टुकड़ी शामिल होती है। समारोह के मुख्य अतिथि भारत के राष्ट्रपति होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में केंद्रीय गृह मंत्री, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री प्रतिनिधि के रूप में शामिल हो सकते हैं।
इस दौरान परेड द्वारा ‘जनरल सलामी’ दी जाती है और पुलिस बैंड द्वारा विशेष धुन बजाई जाती है, जिससे पूरे समारोह का गौरवपूर्ण माहौल बनता है।
वर्दी पर ऐसे धारण किया जाता है ‘निशान’ – राष्ट्रपति पुलिस कलर का प्रतीक चिन्ह, जिसे ‘निशान’ कहा जाता है, सम्मान प्राप्त इकाई के सभी अधिकारी और कार्मिक अपनी वर्दी की बाईं बांह पर धारण करते हैं।
- यह आमतौर पर बाईं बांह पर लगाया जाता है।
- कुछ बलों में इसे चेस्ट बैज के रूप में भी लगाया जाता है।
- कुछ राज्यों में यह नाम-पट्टिका के ऊपर दाईं ओर भी प्रदर्शित किया जाता है।
यह प्रतीक न केवल सम्मान का चिन्ह होता है, बल्कि यह उस बल की उत्कृष्ट सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण भी होता है।

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