उत्तराखंड कैडर के 3 वरिष्ठ अधिकारियों के भविष्य का फैसला मुख्यमंत्री धामी के हाथ में है, वह ऐसे कि उत्तराखंड कैडर के तीन अधिकारी आर. के सुधांशु, सेंथिल पांडियन व शैलश बगौली आगामी दिनों राज्य में तैनात रहेंगे या प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे इसका निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्णय पर निर्धारित है।
पहले बात करें प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु की तो 1997 बैच के सुधांशु इस वक्त केंद्र में अपर सचिव स्तर की रैंक पर इम्पेनल है। आगामी वर्षो में उनका बैच केंद्र में सचिव स्तर पर इम्पेनल हो जाएगा, लेकिन सचिव स्तर पर एम्पलनमेन्ट होने के लिए एक अधिकारी को केंद्र में संयुक्त सचिव JS व अपर सचिव AS पद पर कुल 3 वर्ष कार्य करना अनिवार्य होता है। वंही प्रमुख सचिव सुधांशु के मामले में उन्होंने संयुक्त सचिव JS रैंक पर सिर्फ 2 साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति काटी है, व सचिव स्तर पर एम्पलनमेन्ट होने के लिए उन्हें एक वर्ष की और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति काटनी पड़ेगी, जिस क्रम में उन्होंने भविष्य के समीकरणों को देखते हुए सचिव पद पर एम्पलनमेन्ट होने के लिए कुछ रोज पूर्व केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उनका नाम भेजने के लिए राज्य सरकार से NOC / अनुमति मांगी थी, लेकिन फिलहाल कार्मिक विभाग की उक्त पत्रावली पर कोई भी निर्णय नहीं हो सका है व पत्रावली गतिमान है। राज्य सरकार अगर इस प्रकरण पर NOC नहीं देती है तो प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु को फिलहाल उत्तराखंड में ही कर्यरत रहना होगा।
अब बात करें उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के IAS अधिकारी सेंथिल पांडियन की तो वह इस वक्त वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। उनका 5 वर्ष का डेपुटेशन मई 2026 में खत्म हो रहा है। उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को 2 वर्ष और बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से NOC मांगी है। लेकिन फिलहाल उनके पत्र पर अभी तक कुछ निर्णय नहीं हो पाया है व पत्रावली अभी गतिमान है। अगर राज्य सरकार को लगता है कि इस वक्त उनकी जरूरत उत्तराखंड में है तो उनको धामी सरकार NOC न देकर मई माह में वापस उत्तराखंड बुला सकती है, अन्यथा NOC मिलने के क्रम में वह आगामी 2 वर्ष भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ही तैनात रहेंगे।
अंत मे बात करें 2002 बैच के सचिव शैलश बगौली की तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की तैनाती में नाम आने के बावजूद भी राज्य सरकार ने उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजने पर अनिच्छा जाहिर की है जिस क्रम में मुख्य सचिव की ओर से DOPT को पत्र भी प्रेषित किया जा चुका है, लेकिन DEBAR की तलवार बगौली के गले मे झूलती देख शायद राज्य सरकार उनको आगामी दिनों व माह में उन्हें राज्य से रिलीव कर दें। आपको बता दें कि बगौली को राज्य ने ही प्रतिनियुक्ति हेतु आवेदन करने के लिए NOC, जनवरी 2025 के इर्दगिर्द में दी थी लेकिन जब उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की तैनाती 12 माह बाद आई तो फिलहाल राज्य सरकार ने उन्हें रिलीव करने से मना कर दिया है। अब आगामी दिनों में देखना होगा कि इन तीनों प्रकरणों में ऊंट किस ओर बैठता है।

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