करोड़ों की भूमि खुर्दबुर्द करने वालों का हुआ भंडाफोड़, तहसीलदार ने अपनी ही कोर्ट से भूमाफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश किया जारी !!

तहसीलदार शादाब द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट में उन्होंने बताया कि 20 मई 2024 को जनता दरबार में ग्राम अनारवाला के भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं गुच्चुपानी, जौहड़ी एवं चन्द्रोटी ग्राम के विभिन्‍न व्यक्ति इस शिकायत के साथ मिले कि गुच्चुपानी में प्राचान जल का एक स्रोत है जिसका उपयोग ग्रामीण वर्षों से पीने के पानी के रूप में करते रहे हैं। जल स्रोत के ऊपर एक बड़ा बगीचा होता था तथा एक सन्यासी महिला का मंदिर होता था। उनके देहांत के पश्चात्‌ यह खण्डहर के रूप में वर्षों तक पड़ा रहा। कुछ दिन पूर्व वहां भूमाफियाओं द्वारा फलदार पेड़ों को आग लगायी गयी तथा उस जमीन पर प्लाटिंग का प्रयास किया जाने लगा । शिकायतकर्ताओं द्वारा उक्त कृत्य में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गयी।


उक्त शिकायत पर जिलाधिकारी देहरादून द्वारा तहसीलदार सदर को गहनता से जांच-पड़ताल हेतु निर्देशित किया गया। जब गंभीरता से जांच की गयी तो संज्ञान में आया कि विवादित स्थल पर्यटक स्थल गुच्चुपानी के समीप राजस्व ग्राम चन्द्रोटी का हिस्सा है। मौके पर वनाग्नि तथा छोटे वृक्ष एवं झाड़ी कटान के अवशेष पाये गये। उक्त भूमि का माप 4 बीघा है जिसका बाजार मूल्य कम से कम 20-25 करोड़ रूपये हैं।

राजस्व अभिलेखों में यह भूमि वर्ष 1953 से बिंदा गिरी चेला लक्ष्मण गिरी की है। अचानक से दिनांक 25 मई 2024 को सब-रजिस्ट्रार द्वितीय देहरादून के कार्यालय में बिंदा गिरी चेला लक्ष्मण गिरी द्वारा सतीश गुप्ता पुत्र  निवासी विजयपुर, हाथीबड़कला जनपद देहरादून को गिफ्ट डीड कर दी जाती है। उक्त का दाखिल खारिज भी अप्रैल 2023 में हो जाता है। चूंकि राजस्व अभिलेखों में बिंदा गिरी नामक व्यक्ति 1953 में 18 वर्ष से अधिक आयु के होते हैं। इसलिए वर्ष 2024 में उनकी उम्र लगभग 90 वर्ष होनी चाहिए। ऐसी दशा में संदेह की स्थिति उत्पन्न होने के कारण बिंदा गिरी के आधारकार्ड की जांच की गयी । जांच में यह तथ्य निकलकर आया कि बिंदा गिरी का उक्त आधारकार्ड फर्जी एवं कूटरचित है। उस नम्बर पर कोई आधघार कार्ड जारी ही नहीं हुआ है। जब बिंदा गिरी के कनखल हरिद्वार स्थित पते पर जांच की गयी तो ऐसा कोई पता एवं व्यक्ति जांच में नहीं पाये गये।

उसके पश्चात न्यायालय तहसीलदार देहरादून में दाखिल खारिज की पत्रावली को तलब कर सुनवाई की गयी। जिस व्यक्ति सत्तीश कुमार गुप्ता के नाम गिफ्ट डीड हुई है उसने बिंदा गिरी को पुरूष होना स्वीकार किया जबकि जांच में बिंदा गिरी का महिला होने का तथ्य प्रकाश में आया अर्थात्‌ महिला को पुरुष दर्शाकर करोड़ो की भूमि हड़पने का कार्य किया गया। यह भी तथ्य स्पष्ट हुआ कि बिंदा गिरी की मृत्यु वर्ष 1980 के दशक में हो चुकी है तथा उनकी कोई भी संतान नहीं थी अर्थात्‌ उनकी लावारिस मृत्यु हुई। ऐसी स्थिति में तत्काल उक्त भूमि राज्य सरकार में निहित हो जानी चाहिए थी परंतु इस प्रक्रिया का अनुपालन न होने के कारण उपरोक्त भूमाफियाओं द्वारा फर्जी व्यक्ति को सब-रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत करके पहले गिफ्ट डीड करायी फिर दाखिल खारिज भी करवा लिया।

तहसीलदार शादाब ने बताया कि उक्त दाखिल खारिज को निरस्त करते हुए सब-रजिस्ट्रार को तत्काल भूमाफियाओं एवं फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले व सम्मिलित समी व्यक्तियों के विरूद्ध FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अतिरिक्त उक्त भूमि को राज्य सरकार में निहित किये जाने के लिए रिपोर्ट उपजिलाधिकारी सदर देहरादून को भेजी गयी थी