उत्तराखंड शासन ने सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय न्यायाधिकरणों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए बड़ा फैसला लिया है। न्याय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने हेतु वरिष्ठ अधिवक्ताओं का नया पैनल गठित किया गया है। शासन का मानना है कि इस कदम से न केवल मामलों की सुनवाई में समन्वय बढ़ेगा, बल्कि अनावश्यक व्यय पर भी रोक लगेगी।
आदेश में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय, केंद्रीय न्यायाधिकरणों तथा अन्य न्यायिक मंचों पर दायर याचिकाओं एवं अपीलों में राज्य का पक्ष रखने के लिए चयनित वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अधिकृत किया गया है। यह निर्णय राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लिया गया।
इन अधिवक्ताओं को किया गया शामिल –

अलग से तय होगी फीस
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पैनल में शामिल अधिवक्ताओं की फीस का निर्धारण पृथक आदेश से किया जाएगा। शासन का तर्क है कि एक संगठित पैनल बनने से मामलों में निरंतरता रहेगी और बार-बार नए अधिवक्ताओं की नियुक्ति से होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
मजबूत होगी कानूनी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट में प्राइवेट अधिवक्ताओं के सिंडिकेट व नेक्सस को तोड़ने के लिए ऐसे में अनुभवी अधिवक्ताओं का पैनल तैयार कर सरकार अपनी कानूनी रणनीति को और मजबूत करना चाहती है। इससे मामलों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण की उम्मीद जताई जा रही है।

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