25 वर्ष के उत्तराखंड में बढ़ने के बजाए घट गए पुलिस महकमे के हजारों यह पद, निचले स्तर (सिपाही – सीधी भर्ती) के 3500 पद समर्पित करने का दिख रहा धरातल पर इन दिनों यूं असर, अब नई भर्ती की जोइनिंग का इंतेजार, नए नियतन का प्रस्ताव भी PHQ में काफी समय से दबा !!

25 वर्ष के उत्तराखंड में जहां बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए विभिन्न विभागों में विभिन्न स्तर के पदों में इजाफा तो हुआ लेकिन वंही उत्तराखंड का पुलिस महकमा ऐसा है जहां 25 वर्ष में पद बढ़ने के बाजए घट गए, घटे भी उस निचले स्तर के जिनकी सबसे ज्यादा इस महकमें में आवश्यकता होती है। आये दिन उत्तराखंड में बड़ी बड़ी घटनाओं के लिए पुलिस व पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को तो सब कोस बैठते हैं लेकिन उनके संसाधन में जो सेंधमारी हुई है उसपर सबकी नजर कम जाती है।

बात करें आंकड़ों की तो उत्तराखंड पुनर्घठन (वर्ष 2001) के दौरान प्रदेश में नागरिक पुलिस (आसान भाषा में थाना पुलिस) में निरीक्षक / इंस्पेक्टर के 49 पद, उपनिरीक्षक के 596 पद, हेड कॉन्स्टेबल के 641 पद व कॉन्स्टेबल (सिपाही) के 7299 पद सृजित थे।

आज की तारीख में इन पदों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है कुछ रैंकों में पद बढ़े हैं तो कुछ में घटे भी हैं- इस वक्त उत्तराखंड में नागरिक पुलिस में निरीक्षक / इंस्पेक्टर के 275 पद, उपनिरीक्षक के 1300 पद, अपर उपनिरीक्षक – करीब 700, हेड कॉन्स्टेबल के करीब 2220 पद व कॉन्स्टेबल (सिपाही) के करीब 5750 पद सृजित हैं।

वर्ष 2022 के बाद से अचानक आया पुलिसिंग में परिवर्तन – 2001 बैच के कॉन्स्टेबल द्वितीय ACP के तहत 4600 ग्रेड पे चाहते थे, लेकिन वित्त विभाग ने बढ़ता वित्त भार देखते हुए कॉन्स्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल व हेड कॉन्स्टेबल से अगली पदोन्नति नए पद ASI – अपर उपनिरीक्षक पद पर करने का फैसला किया, जिससे अगली ACP न देते हुए सिर्फ नए रैंक पर पदोन्नति दी जाए। इससे हुआ यह कि अपर उपनिरीक्षक के 1750 पद नए सृजित करने में व मुख्य आरक्षी के अतिरिक्त 1750 पद सृजित करने के लिए वर्ष 2022 में सीधी भर्ती वाले सिपाही / कॉन्स्टेबल के 3500 पद समर्पित कर दिए गए। जिस क्रम में विभिन्न संवर्गों में कॉन्स्टेबल के पद 17503 से घटकर 14003 तक पंहुच गए।

कॉन्स्टेबल की कमी से विभिन्न ड्यूटी में पढ़ रहा प्रभाव– पुलिस महकमे में कोतवाली, थाना व चौकी स्तर पर दरोगा, अपर पुलिस उपनिरीक्षक व हेड कॉन्स्टेबल की संख्या में भारी इजाफा तो हुआ लेकिन कॉन्स्टेबल की संख्या एक दम से गिरावट आई है। निचले स्तर की ड्यूटी – रात्रि गश्त, बीट, रात्रि चेकिंग, मुलजिम ड्यूटी, पिकेट ड्यूटी, चोर पेहरा, VIP ड्यूटी, गार्ड ड्यूटी, लॉ एंड आर्डर ड्यूटी जैसे अन्य कामों में के लिए सिपाही नहीं मिल रहे हैं व जब मुख्य आरक्षी व अपर उपनिरीक्षक को इस प्रकार की ड्यूटी पर लगाया जाता है तो वह इसको अपनी शान व पद के अनुरूप न मानकर इस प्रकार की ड्यूटी करने तक के लिए अनिच्छा जाहिर कर देते हैं।

2000 सिपाही की भर्ती गतिमान – धरातल पर कॉन्स्टेबल की कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने नियतन में रिक्त पड़े पद पर करीब 2000 (विभिन्न संवर्ग) कॉन्स्टेबलों की भर्ती खोली है। भर्ती अभी गतिमान है, जिसके उपरांत ट्रेनिंग होते होते जोइनिंग में करीब 1 साल से भी अधिक समय लगने का अनुमान है। तब जाकर उत्तराखंड में पुलिस के कानूनी हाथ कुछ मजबूत होंगे

ब्रिटिश काल का नियतन आज भी नहीं बदला, पुलिस मुख्यालय दबा कर बैठा आख्या- उत्तराखंड में अधिकांश पुराने थाने व कोतवाली जो ब्रिटिश काल के दौरान थी उनमें जो नियतन उस समय था, आज भी उन थानों व कोतवाली में उतना ही नियतन बरकरार है। धरातल पर पुलिस विभाग का नियतन बढ़ाने के लिए एक बार तो कोशिश हुई लेकिन पुलिस मुख्यालय के सुस्त रवैया के कारण अभी तक नए नियतन पर कुछ अनतिम मुहर न लग सकी। आपको बता दें कि करीब 1 से 1.5 वर्ष पूर्व उत्तराखंड के थाने, कोतवाली व चौकी का नियतन बढ़ाने संबंधित प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय से शासन भेजा गया लेकिन वित्त विभाग ने उक्त पत्रावली में पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के थानों व चौकी का नियतन का उल्लेख करने के लिए कहा, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी आतिथि तक शासन को पुलिस मुख्यालय से आख्या अप्राप्त है।