CM से अनुमोदित अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्गत आदेश 2 माह से गायब, प्रकरण की बैठी जांच, DIG करेंगे जांच।

हाल ही में एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसने सरकारी सिस्टम की पोल खोल दी है। मामला भी इतना विचित्र है कि एक गलती के होने से एक पुलिस अधिकारी नियमविरुद्ध 2 माह अधिक सेवा कर बैठा।

आपको बता दें कि 16 दिसम्बर 2025 को उत्तराखंड शासन के गृह अनुभाग 1 से मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित पत्रावली के क्रम में एक आदेश निर्गत होता है जिसमें एक 40 PAC के दलनायक को विभिन्न प्रकरणों में दोषसिद्ध होने के उपरांत अनिवार्य सेवानिवृति देने का निर्णय लिया जाता है।

उक्त महत्वपूर्ण आदेश जो 1 से 2 दिन में शासन से PAC मुख्यालय या पुलिस मुख्यालय पंहुचना था वह करीब 2 माह बाद भी नहीं पंहुचा, जब इस प्रकरण की भनक महकमे के उच्चाधिकारी को लगी तो आनन फानन में शासन से पुनः आदेश मंगवाकर 4 फरवरी 2026 को IG PAC द्वारा 40 PAC के कमांडेंट को पत्र लिख अनिवार्य सेवानिवृत्त को अमल में लाने की कार्यवाही हेतु आदेश दिए गए।

अब इस लेट लतीफी का अंजाम यह हुआ कि जिस दलनायक खजानची लाल की सेवा 16 दिसंबर के इर्दगिर्द ही समाप्त होनी थी, वह अभी भी 2 माह से सेवा कर रहा है व तनख्वाह भी ले रहा है। यहां तक की जनवरी 2026 में कार्यरत होने के उपरांत 8वे वेतन आयोग की नए वेतन / पेंशन का हकदार तक हो गया।

यहां हुई चूक – इस प्रकरण को लेकर महकमे के भीतर विभिन्न तरह की चर्चायें तेज हैं, कुछ का मानना है कि शासन को इस तरह के गंभीर पत्रों को आम / सामान्य डाक से नहीं भेजना चाहिए जोकि ट्रेस नहीं हो पाते हैं। कुछ का कहना है कि वह डाक PAC मुख्यालय पंहुची ही नहीं, कुछ का कहना है कि पत्र पुलिस मुख्यालय को संबोधित न होकर सीधा ही PAC क्यों भेज दिया दिया, जबकि उक्त पत्र के बारे में पुलिस मुख्यालय को भी अवगत करवाना चाहिए था। इस प्रकरण ने तरह तरह की शासकीय प्रणालियों की पोल खोल दी है।

इस प्रकरण व चूक को गंभीर मानते हुए पुलिस महकमे ने उक्त प्रकरण की जांच बैठा दी है। इस जांच की जिम्मेदारी DIG PAC मुकेश कुमार को दी गयी है। जो इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं।