मुख्यमंत्री की पहल पहले ही दिन हिट, राजस्व लोक अदालत में सालों से लंबित 5322 मामले एक ही दिन में हुए निस्तारित !!

उत्तराखंड में लंबित राजस्व वादों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आयोजित ‘राजस्व लोक अदालत’ ने रिकॉर्ड स्तर पर काम किया है। प्रदेशभर में आयोजित इस विशेष अभियान में कुल 5323 वादों का निस्तारण किया गया है।

लोक अदालत में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राजस्व से जुड़े विवाद केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके साथ किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका और व्यक्तियों का आत्मसम्मान भी जुड़ा होता है। ऐसे में इनका समयबद्ध समाधान अत्यंत आवश्यक है।


हरिद्वार में सबसे ज्यादा निस्तारण, ऊधमसिंह नगर दूसरे स्थान पर

राजस्व लोक अदालत के आंकड़ों में हरिद्वार जनपद सबसे आगे रहा, जहां 1911 मामलों का निस्तारण किया गया। दूसरे स्थान पर ऊधमसिंह नगर रहा जहां 928 वादों का समाधान हुआ, वंही नैनीताल में 722 तो बड़े जनपदों में देहरादून सबसे पिछड़ा रहा जहां सिर्फ 412 वादों का ही निस्तारण हो पाया


पर्वतीय जिलों में भी असरदार पहल

पहाड़ी जिलों में भी लोक अदालत का असर देखने को मिला।

  • पौड़ी – 305 वाद
  • अल्मोड़ा – 299 वाद
  • उत्तरकाशी – 183 वाद
  • टिहरी – 214 वाद
  • चंपावत – 51 वाद
  • बागेश्वर – 62 वाद
  • पिथौरागढ़ – 63 वाद
  • चमोली – 70 वाद
  • रुद्रप्रयाग – 23 वाद

किन मामलों का हुआ निस्तारण

लोक अदालत में विभिन्न अधिनियमों और धाराओं से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया। इनमें प्रमुख रूप से:

  • भू-राजस्व अधिनियम के मामले (सबसे अधिक संख्या-143, 166, 167, 176, आदि)
  • स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन से जुड़े विवाद
  • आबकारी अधिनियम
  • खाद्य सुरक्षा अधिनियम
  • पंचायत राज अधिनियम
  • सरफेसी अधिनियम
  • विद्युत एवं अन्य राजस्व वसूली से जुड़े प्रकरण

कई जिलों में विशेष रूप से धारा 34 (भू-राजस्व) और स्टांप एक्ट के मामलों की संख्या अधिक रही।


राजस्व वसूली में भी बढ़ोतरी

लोक अदालत के दौरान केवल विवादों का निस्तारण ही नहीं हुआ, बल्कि कई मामलों में बकाया राजस्व की वसूली भी की गई।
विशेष रूप से हरिद्वार में करीब 54 लाख रुपये की वसूली दर्ज की गई, जिससे सरकारी खजाने को भी मजबूती मिली।


राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान से आम लोगों को लंबित मामलों से राहत मिली है। वर्षों से चल रहे विवादों का मौके पर समाधान होने से लोगों का समय और धन दोनों बचा।

साथ ही नियमित न्यायालयों पर लंबित मामलों का दबाव भी कम हुआ है, जिससे भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।


आगे भी जारी रहेगा अभियान

राजस्व परिषद के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह की लोक अदालतें आगे भी नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएंगी, ताकि लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके और जनता को शीघ्र न्याय मिल सके।