आज उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए “उत्तराखंड लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली नियमावली, 2025” को मंजूरी दे दी गई। इस नई नियमावली के तहत अब दंगों, बंद, प्रदर्शनों और सड़क जाम के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई सीधे जिम्मेदार व्यक्तियों या आयोजकों से की जाएगी।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार यह नियमावली पूरे राज्य में लागू होगी और गजट में प्रकाशन के साथ प्रभावी हो जाएगी। इसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि, लोक अशांति या प्रदर्शन के दौरान हुई चल और अचल संपत्ति की क्षति को इसमें शामिल किया जाएगा।
आयोजकों पर सख्ती, अनुमति से पहले होगी समीक्षा– अब किसी भी जुलूस या सभा के आयोजन से पहले जिला प्रशासन (सिटी मजिस्ट्रेट / SDM) और पुलिस (SHO / CO) द्वारा विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आयोजकों को एक अनिवार्य अंडरटेकिंग देनी होगी, जिसमें किसी भी प्रकार की क्षति होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी लेने की बात होगी। साथ ही प्रदर्शन के दौरान हथियार, लाठी, ज्वलनशील पदार्थ या खतरनाक सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
डिजिटल साक्ष्य से तय होगी जिम्मेदारी– नियमावली में तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। हर थाने स्तर पर वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था होगी, जिससे घटनाओं का साक्ष्य सुरक्षित रखा जा सके। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद इन वीडियो को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रमाणित किया जाएगा और इन्हें कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता दी जाएगी।
क्लेम्स ट्रिब्यूनल करेगा नुकसान का आकलन– सरकार ने नुकसान के निर्धारण के लिए एक विशेष क्लेम्स ट्रिब्यूनल बनाने का प्रावधान किया है। इसमें सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश को अध्यक्ष और एक प्रशासनिक अधिकारी को सदस्य बनाया जाएगा। यह ट्रिब्यूनल नुकसान का आकलन कर मुआवजे की राशि तय करेगा।
चयन प्रक्रिया: अध्यक्ष का चयन एक “सर्च-सह-चयन समिति” द्वारा किया जाएगा, जिसमें मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (गृह) और प्रमुख सचिव (न्याय) शामिल होंगे।
दावा आयुक्त: राज्य प्रशासनिक सेवा के राजपत्रित अधिकारी को दावा आयुक्त नियुक्त किया जाएगा, जो साक्ष्यों के विश्लेषण और दावों के पंजीकरण हेतु उत्तरदायी होगा।
बाजार दर पर होगा मुआवजा, लग सकते हैं दंडात्मक शुल्क– चल संपत्ति का मूल्यांकन बाजार दर के आधार पर और भवनों का आकलन तय मानकों के अनुसार किया जाएगा। खास मामलों में ट्रिब्यूनल अतिरिक्त दंडात्मक (Exemplary) क्षतिपूर्ति भी लगा सकता है, खासकर यदि नुकसान सरकारी संस्थानों, अस्पतालों या ऐतिहासिक धरोहरों को हुआ हो।
वसूली होगी भू-राजस्व की तरह– कैबिनेट के फैसले के अनुसार तय मुआवजे की राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी। इसके अलावा दोषियों के सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर भी लगाए जा सकते हैं, जिनका खर्च भी उनसे ही वसूला जाएगा।
सरकार को मिला कानूनी संरक्षण– नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि सद्भावनापूर्वक किए गए कार्यों के लिए सरकार या अधिकृत अधिकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

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