उत्तराखंड की धामी सरकार अब ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के निर्माण के बाद अब नए रेलवे लाइनों के निर्माण व प्रदेश में रेलवे नेटवर्क को बढ़ाने के क्रम में लग गयी है। जिस क्रम में अब मुख्य सचिव आनंद वर्धन की ओर रेलवे बोर्ड को एक अहम पत्र लिखा गया है।
उक्त पत्र में रेलवे बोर्ड को 4 नई परियोजनाओं के प्रस्ताव भेजे गए हैं जिनपर रेलवे बोर्ड को जल्द से जल्द निर्णय व सर्वे शुरू करने के लिए कहा गया है।
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि – डोईवाला–उत्तरकाशी और कर्णप्रयाग–पिपलकोटी नई ब्रॉड गेज रेल लाइन के लिए अंतिम लोकेशन सर्वे (FLS) रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है व परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त भविष्य की परियोजनाओं में एस्केप टनल का आकार बढ़ाने पर भी विचार करने के लिए कहा गया है जिससे आवश्यकता पड़ने पर एस्केप टनल को हाईवे टनल के रूप में उपयोग किया जा सके।
मौजूदा रेल नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत –
पत्र में ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन के प्रस्तावित संचालन (2028 लक्ष्य) को देखते हुए वर्तमान नेटवर्क को अपग्रेड करने पर जोर दिया गया है। जिस क्रम में हरिद्वार–देहरादून रेल लाइन (रायवाला–डोईवाला मार्ग) के दोहरीकरण व साथ ही साथ
रायवाला–डोईवाला और रायवाला–वीरभद्र के बीच रेल कॉर्ड लाइन निर्माण की मांग की गई है। जिससे देहरादून–ऋषिकेश के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित की जा सके।
वंही राज्य सरकार ने दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरे होने के कारण टनकपुर से बागेश्वर तक रेल लाइन स्थापित करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। प्रस्तावित लाइन से चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे सीमांत जिलों को रेल संपर्क मिलेगा। रेलवे द्वारा प्रस्तावित तीन सर्वेक्षणों में से राज्य सरकार ने टनकपुर–चंपावत–अल्मोड़ा–बागेश्वर मार्ग वाले वैकल्पिक एलाइनमेंट की सिफारिश की है। हालांकि यह एलाइनमेंट अभी अंतिम रूप में स्वीकृत नहीं हुआ है। यह रेल लाइन पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है।
बागेश्वर–कर्णप्रयाग खंड के सर्वे की मांग –
मुख्य सचिव ने रेलवे बोर्ड को यह भी सुझाव दिया है कि बागेश्वर–कर्णप्रयाग रेल खंड को जोड़ने से टनकपुर, चंपावत, अल्मोड़ा और बागेश्वर से राज्य की राजधानी देहरादून तक सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित हो सकेगी। बता दें कि यह प्रस्ताव ऋषिकेश–कर्णप्रयाग परियोजना के आगामी दो वर्षों में शुरू होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए रखा गया है। टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन पर काम शुरू होने के उपरांत बागेश्वर–कर्णप्रयाग खंड इस अर्धवृत्ताकार रेल नेटवर्क को पूर्ण करेगा, जो टनकपुर से शुरू होकर ऋषिकेश तक पहुंचेगा। जिससे परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता भी बढ़ेगी।

Editor

