उत्तराखंड सरकार ने हिमालयी राज्यों के बीच समन्वय और नीति निर्धारण को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नियोजन विभाग के अधीन ‘हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद’ का गठन किया गया है। परिषद का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में सतत, समावेशी और डिजिटल विकास को बढ़ावा देना है।
शासन की ओर से जारी कार्यालय आदेश के अनुसार परिषद का कार्यक्षेत्र पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जल एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वन एवं जैव-विविधता संरक्षण, पर्यटन, आजीविका, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सामाजिक-आर्थिक विकास जैसे अहम क्षेत्रों तक विस्तृत रहेगा।
यह होंगे सदस्य


डिजिटल हिमालय पर विशेष फोकस – परिषद ‘डिजिटल, हरित एवं समावेशी हिमालय’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में कार्य करेगी। इसके तहत एआई, जीआईएस और आईओटी आधारित तकनीकों का उपयोग कर वास्तविक समय निगरानी, आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलागम क्षेत्र प्रबंधन और स्मार्ट निर्णय समर्थन प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे। ‘डिजिटल हिमालयन डैशबोर्ड’ के माध्यम से पर्यावरण, आजीविका और लैंगिक संकेतकों की निगरानी की जाएगी।
तीन वर्ष का प्रारंभिक कार्यकाल– परिषद प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए कार्य करेगी, जिसे आवश्यकता और प्रदर्शन के आधार पर बढ़ाया जा सकेगा। शासी निकाय की बैठक कम से कम छमाही आधार पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जबकि कार्यकारी समिति प्रगति की त्रैमासिक समीक्षा करेगी।
11 हिमालयी राज्यों का सहयोगी नेटवर्क- परिषद का उद्देश्य सभी 11 हिमालयी राज्यों को जोड़कर एक सहयोगी नेटवर्क तैयार करना है। विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिव स्तर के प्रतिनिधियों के माध्यम से संयुक्त परियोजनाएं, शोध अध्ययन और क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
नीति आयोग व केंद्र से अपेक्षित सहयोग– नीति आयोग और भारत सरकार से तकनीकी विशेषज्ञता, शोध सहयोग, विश्लेषणात्मक उपकरणों और वित्तीय सहायता की अपेक्षा की गई है। बहु-राज्यीय परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
रोजगार व महिला सशक्तिकरण पर जोर – परिषद हरित उद्यमों, डिजिटल सेवाओं और पर्यटन आधारित गतिविधियों के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देगी। महिलाओं और युवाओं को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाकर सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।
देहरादून में होगा मुख्यालय– परिषद का मुख्यालय देहरादून में स्थापित किया गया है। इसके प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यय का वहन नियोजन विभाग के अंतर्गत किया जाएगा।

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