शासन से लेकर धरातल तक कार्मिक विभाग ने एक ट्रांसफर सूची जारी की है। जिसमे बड़े बड़े नामों के साथ साथ बड़े बड़े विभागों की जिम्मेदारी में फेरबदल किया गया है।
पहले बात करें शासन स्तर की तो शासन में प्रमुख सचिव आर० मीनाक्षी सुंदरम से सचिव मुख्यमंत्री के बाद अब आवास विभाग की जिम्मेदारी भी हटा दी गयी है। एक वक्त पर मुख्यमंत्री के करीब माने जाने वाले मीनाक्षी सुंदरम से इस सूची में वह आवास विभाग हटा दिया गया गया जोकि सुंदरम ने एक वक्त पर तत्कालीन ACS आनंद वर्धन से लिया था। शासन की गलियारों में यही चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है कि जो अधिकारी मुख्यमंत्री के विजन को धरातल में उतारने के लिए दिन रात लगा रहता है उससे एक एक करके जिम्मेदारियां कम क्यों की जा रही है, वंही चर्चा यह भी है कि आगामी दिनों में मीनाक्षी सुंदरम को सचिव शैलश बगौली के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उनकी कुछ अन्य जिम्मेदारियां दी जा सकती है।
अब बात करें शैलेश बगौली के प्रतिनियुक्ति पर जाने की तो वह अभी असमंजस की स्तिथि में है। राज्य सरकार जहां उन्हें फिलहाल प्रतिनियुक्ति पर भेजने से रोकना चाहती है व उनका इस्तेमाल चुनावी वर्ष में करना चाहती है, यहां तक की उनके उत्तराखंड में कार्यरत रखने के लिए पत्र भी DOPT को भेज दिया गया है तो वंही इच्छा के विरुद्ध बगौली उत्तराखंड में पूर्ण निष्ठा व पूरे मन से चुनावी वर्ष में शासकीय काम करेंगे ? यह भी सोचनीय विषय है। चर्चा यहां तक है कि शैलेश के करियर को देखते हुए व DEBAR होने के क्रम में मुख्यमंत्री धामी जल्द ही उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए हरी झंडी दिखा सकते हैं।
शैलेश बगौली के अहम विभाग पेयजल की जिम्मेदारी अब रणवीर चौहान को दी गयी है, इस ट्रांसफर सूची में चौहान को सचिव पेयजल व सचिव SAD बनाया गया है। आंकलन के अनुसार व नियमानुसार अब आगामी दिनों में सचिव रणवीर चौहान से MD पेयजल की जिम्मेदारी किसी अन्य को दी जाएगी। चर्चा यह है कि वर्तमान अपर सचिव पेयजल को यह अतिरिक्त प्रभार के रूप में यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। दिन पर दिन रणवीर के बढ़ते कद व नियोजित कार्यशैली ने यह तो साबित कर दिया है कि अगर बगौली प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाते हैं तो रणवीर चौहान मुख्यमंत्री सेटअप में बगौली की जगह लेने व उसी ढंग से जिम्मेदारी संभालने की काबलियत रखते हैं।
काफी समय से साइड लाइन पड़े सचिव सचिन कुर्वे को मुख्यमंत्री धामी ने खुद को साबित करने के लिए एक और मौका दिया है। उन्हें अब स्वाथ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है। जिसको कुर्वे ने एक चैलेंज के रूप में लिया है। 3 वर्ष से भी अधिक समय तक स्वास्थ्य विभाग की कमान संभालने वाले सचिव राजेश कुमार पर राज्य सरकार ने एक बार फिर विश्वास जताया है उन्हें आवास विभाग के साथ साथ राज्य संपत्ति विभाग की जिम्मेदारी दे दी गयी है।
अब बात करें नए नवेले सचिवों की तो इस सूची में महिला अधिकारियों का बोल बाला चला है। जहां एक तरफ फिलहाल सोनिका के समस्त मलाईदार प्रभार यथावत रखे गए हैं तो वंही सचिव रंजना राजगुरु के राजस्व परिषद के प्रभार को यथावत रखते हुए उन्हें आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है। अन्य सचिव बने अधिकारियों को फिलहाल राज्य सरकार ने टेस्टिंग मोड़ पर रखा है व छोटे छोटे इकलौते विभागों की जिम्मेदारी दी गयी है।
सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े सचिव दीपेंद्र चौधरी को अभी से ही खाली करना शुरू कर दिया गया है। उनसे इस सूची में SAD व आयुष विभाग का प्रभार हटा दिया गया है। उनके पास अब सिर्फ सैनिक कल्याण व सचिव मानवाधिकार आयोग का प्रभार बचा है। जोकि आगामी डेढ़ माह के भीतर ही किसी अन्य के सुपुर्द कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त सचिव देव कृष्ण तिवारी जिन्हें सचिव नियोजन का प्रभार दिया गया है वह भी अप्रैल माह में रिटायर हो जाएंगे।
स्वयं के अनुरोध पर निजी कारणों से IAS अनामिका को CDO नैनीताल के प्रभार से मुक्त करते हुए बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया है। वंही उत्तराखंड कैडर में हाल ही में आये अनामिका के पति प्रवीण कुमार (2021 बैच) को अपर आयुक्त नगर निगम देहरादून के साथ साथ अपर निदेशक शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है। आपको बता दें कि इतिहास में पहली बार नगर निगम देहरादून में 2 IAS अधिकारियों की तैनाती एक साथ की गई है, अभी नगर आयुक्त के पद पर IAS अधिकारी नमामि बंसल (2017 बैच) तैनात है। नगर निगम देहरादून में 2 अधिकारियों की तैनाती करने से यह भी संकेत उछले हैं कि नगर निगम देहरादून में फिलहाल राजनैतिक एवं आधिकारिक प्रकरणों में सब कुछ तो ठीक नहीं चल रहा है।
सूची में अंतिम स्थान पर शामिल नाम मनमोहन मैनाली का है जोकि वित्त सेवा के अधिकारी जरूर हैं लेकिन अपने मृदुभाषी व मीठी बोली से आजकल शासन में अधिकारियों का दिल जीत चुके हैं। उन्हें अपर सचिव वित्त, नोडल खटीमा विधानसभा व नोडल चंपावत विधानसभा की जिम्मेदारी के साथ साथ निदेशक ऑडिट का भी प्रभार दिया गया है।
इन सभी तबादलों के बीच कुछ प्रभारों में और भी बदलाव जल्द आगामी दिनों में होने है जिसके पीछे की वजह यह है कि इस वक्त बड़ी संख्या में अधिकारी अपर सचिव से सचिव पद में पदोन्नति हुई है। जिस कारण शासन में कुछ विभागों में कोई भी अपर सचिव अब मौजूद नहीं है। आंकलन है कि जल्द ही DM स्तर की तबादला सूची आने के बाद कुछ अधिकारियों को जनपद व निदेशालयों से हटा कर शासन स्तर अपर सचिव पद पर तैनात किया जाएगा। आगामी तबादला सूची में एक से दो PCS अधिकारियों को भी शासन स्तर पर तैनाती मिल सकती है।
चर्चा यह भी थी कि सचिव स्तर के अधिकारी सवीन बंसल को इसी सूची में शासन लाने की तैयारी थी लेकिन फिलहाल जनपदों वाली आगामी सूची में ही उन्हें शासन लाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि आगामी दिनों में PWD, सिचाई, खनन जैसे विभागों में भी बदलाव की संभावनाएं है। इसके अतिरिक्त 2 बड़े जनपदों सहित 2 पर्वतीय छोटे जनपदों में भी बदलाव की आहट है।
अचार संहिता के मध्यनजर एक बार फिर कार्मिक व गृह विभाग किसी अन्य को दिए जा सकते हैं –
कार्मिक व गृह विभाग की कमान फिलहाल सचिव शैलेश बगौली संभाले हुए हैं, उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को लेकर फिलहाल स्तिथि स्पष्ट नहीं है लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के मध्यनजर ECI की गाईडलाइन के अनुरूप अचार संहिता के दौरान कार्मिक व गृह विभाग ऐसे अधिकारी के पास होते हैं जोकि सचिव / प्रमुख सचिव / ACS मुख्यमंत्री न हो। इसका मतलब यह है कि चाहे चुनाव तक बगौली रहे या न रहे या फिर अन्य किसी को यह विभाग हाल में दिए जाएं लेकिन अचार संहिता के दौरान करीब डेढ़ माह के लिए दोनों विभाग कार्मिक व गृह विभाग ऐसे अधिकारी के पास नहीं होने चाहिए जोकि मुख्यमंत्री सेटअप में हो।
4 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे दीपक रावत पर सरकार ले साधी चुप्पी –
करीब 4 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ओर अभी सरकार ने चुप्पी साधी हुई है। आगामी चुनाव की बात करें तो हो सकता है उन्हें चुनाव से पूर्व ही शासन में या फिर अन्य अहम जिम्मेदारी पर लाया जा सकता है।

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